फालता में पहली बार खिला कमल: CPM उम्मीदवार को 1.09 लाख वोटों से हराया, चुनाव से हटे TMC प्रत्याशी चौथे स्थान पर रहे

कोलकाता|24 मई 2026
CPM उम्मीदवार को 1.09 लाख वोटों से हराया, चुनाव से हटे TMC प्रत्याशी चौथे स्थान पर रहे

पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए पहली बार अपना परचम लहरा दिया है। भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु ने रिकॉर्ड मतों के अंतर से जीत हासिल कर राज्य की राजनीति में नया संदेश दिया है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और CPM उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी को 1.09 लाख से अधिक वोटों से पराजित किया। भाजपा प्रत्याशी को कुल 1.49 लाख से ज्यादा वोट मिले, जबकि CPM उम्मीदवार करीब 40 हजार मतों पर सिमट गए।

इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू तृणमूल कांग्रेस की कमजोर स्थिति रही। चुनाव से पहले ही टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर ने मैदान छोड़ दिया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें 7,783 वोट मिले और वह चौथे स्थान पर रहे। फालता सीट पर मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ टीएमसी और बीजेपी के बीच माना जा रहा है। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि यह जहांगीर खान का व्यक्तिगत फैसला है और पार्टी की आधिकारिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिलचस्प बात यह रही कि उम्मीदवार की ओर से निर्वाचन आयोग को कोई लिखित सूचना नहीं दी गई, जिसके कारण रीपोलिंग के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर उनका नाम और चुनाव चिह्न बना रहा। इस घटनाक्रम ने मतदाताओं के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा की और विपक्ष ने इसे लेकर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा।

74 साल के इतिहास में पहली बार भाजपा की जीत

फालता विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1952 से लेकर 2006 तक यह क्षेत्र कांग्रेस और CPI(M) का मजबूत गढ़ माना जाता था। लंबे समय तक वामपंथी राजनीति का प्रभाव रहने के बाद यहां तृणमूल कांग्रेस ने अपनी पकड़ मजबूत की थी। 2011 के विधानसभा चुनाव से लेकर लगातार तीन बार टीएमसी उम्मीदवारों ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार भाजपा ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा ने इस चुनाव में बूथ स्तर पर मजबूत संगठन, आक्रामक प्रचार अभियान और स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में सफलता हासिल की। यही वजह रही कि पार्टी ने न सिर्फ टीएमसी के गढ़ में सेंध लगाई, बल्कि ऐतिहासिक अंतर से जीत भी दर्ज की।

भाजपा की कुल सीटें बढ़कर 208 हुईं

फालता सीट पर जीत के साथ भाजपा की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 208 हो गई है। इससे पहले चार मई को घोषित परिणामों में पार्टी को 207 सीटें मिली थीं। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई है। भाजपा की इस बढ़त को पार्टी नेतृत्व आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम मान रहा है। भाजपा नेताओं ने इसे “जनता के विश्वास की जीत” बताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। वहीं विपक्षी दलों के लिए यह परिणाम गंभीर आत्ममंथन का विषय बन गया है। फालता की जीत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्य की राजनीति में अब मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण होने वाला है।

ईवीएम विवाद के बाद रीपोलिंग

फालता सीट पर दोबारा मतदान कराने का फैसला चुनाव आयोग ने गंभीर शिकायतों के बाद लिया था। 29 अप्रैल को मतदान के दिन कई बूथों से ईवीएम में कथित छेड़छाड़ की शिकायतें सामने आई थीं। आरोप लगाया गया था कि भाजपा के चुनाव चिह्न पर टेप चिपकाया गया था, जिससे मतदाताओं को वोट डालने में दिक्कत हो रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्ता ने स्वयं क्षेत्र का दौरा किया और जांच कराई। जांच में करीब 60 बूथों पर गड़बड़ी के संकेत मिले। इसके अलावा कुछ मतदान केंद्रों पर लगे वेब कैमरों की फुटेज के साथ भी कथित तौर पर छेड़छाड़ करने की कोशिश सामने आई। इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने पूरे निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया था।

पहली जीत पर भाजपा की नजर

फालता विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास भी बेहद दिलचस्प रहा है। कभी यह सीट सीपीआई (एम) का मजबूत गढ़ मानी जाती थी, लेकिन पिछले एक दशक में यहां तृणमूल कांग्रेस ने मजबूत पकड़ बना ली है। 2011 से लगातार इस सीट पर टीएमसी जीत दर्ज करती आ रही है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी तृणमूल उम्मीदवार ने लगभग 40 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। दूसरी ओर भाजपा अब तक इस सीट पर जीत का स्वाद नहीं चख सकी है, हालांकि साउथ 24 परगना जिले में पार्टी ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय बढ़त बनाई है। जिले की 31 सीटों में भाजपा 10 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है, जिससे इस बार फालता का मुकाबला और अधिक रोमांचक हो गया है।

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