बेंगलुरु मेट्रो की पर्पल लाइन ठप: तकनीकी खराबी से 5 घंटे परेशान रहे यात्री, स्टेशनों पर उमड़ी भारी भीड़

देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु में मेट्रो सेवा बाधित होने से हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पर्पल लाइन पर आई तकनीकी खराबी के कारण मेट्रो संचालन करीब पांच घंटे तक ठप रहा। पीक आवर्स में सेवा बंद होने से स्टेशनों पर लंबी कतारें लग गईं। वहीं, कई यात्रियों को घर पहुंचने के लिए ट्रक, ऑटो और कैब का सहारा लेना पड़ा। घटना से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए।
बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) के अनुसार, मंगलवार शाम करीब छह बजे क्यूब्बन पार्क मेट्रो स्टेशन पर पर्पल लाइन की एक ट्रेन में तकनीकी खराबी आ गई थी। सुरक्षा कारणों से पूरी लाइन का संचालन रोकना पड़ा। इसके चलते व्हाइटफील्ड से लेकर शहर के केंद्रीय क्षेत्रों तक यात्रा करने वाले हजारों लोग प्रभावित हुए। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद बुधवार सुबह पांच बजे सेवाएं सामान्य हो सकीं।
आईटी पेशेवरों की लाइफलाइन मानी जाती है पर्पल लाइन
पर्पल लाइन बेंगलुरु के सबसे व्यस्त मेट्रो कॉरिडोरों में शामिल है। यह शहर के प्रमुख आईटी हब व्हाइटफील्ड और इंटरनेशनल टेक पार्क बेंगलुरु (आईटीपीएल) को केंद्रीय व्यावसायिक क्षेत्रों से जोड़ती है। प्रतिदिन लाखों कर्मचारी इसी मार्ग का उपयोग कर अपने कार्यालय पहुंचते हैं। टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो, कॉग्निजेंट, आईबीएम और ओरैकल जैसी कंपनियों के कर्मचारी भी बड़े पैमाने पर इसी कॉरिडोर पर निर्भर हैं। तकनीकी खराबी के कारण मेट्रो सेवा रुकने से सड़क परिवहन व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया। कैब और ऑटो की मांग अचानक बढ़ने से यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। कई लोगों ने ट्रकों और अन्य मालवाहक वाहनों के जरिए घर पहुंचने का विकल्प चुना।
सांसद तेजस्वी सूर्या ने उठाए सवाल
घटना के बाद बेंगलुरु दक्षिण से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा कि बेंगलुरु में विश्वस्तरीय तकनीकी प्रतिभा तो है, लेकिन बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक व्यवस्था की चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि मेट्रो सेवा में बार-बार आने वाली बाधाएं शहर के लाखों लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रही हैं। सूर्या ने कहा कि हर बार मेट्रो सेवा बाधित होने पर पूरा शहर अव्यवस्था की स्थिति में पहुंच जाता है। यात्रियों को न तो समय पर कैब मिलती है और न ही ऑटो चालक आसानी से यात्रा के लिए तैयार होते हैं। ऐसे में लोगों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। घटना ने एक बार फिर बेंगलुरु की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की क्षमता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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