सिंधु जल विवाद पर पाकिस्तान बेचैन: एलओसी पर सैन्य गतिविधियां तेज, युद्ध की चेतावनी के बीच अतिरिक्त सैनिक तैनात

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के फैसले का असर अब पाकिस्तान की रणनीतिक और राजनीतिक गतिविधियों में दिखाई देने लगा है। जल संकट और क्षेत्रीय दबावों के बीच पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठा रहा है। लेकिन अब तक उसे कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी है। इसी बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के युद्ध संबंधी बयानों और सेना की बढ़ती गतिविधियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान सेना ने एलओसी पर अपनी निगरानी और रक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है। पाकिस्तानी सेना की आठ ब्रिगेडों ने विभिन्न सेक्टरों में 35 एंटी-ड्रोन यूनिट तैनात की हैं। इसके अलावा एआई आधारित फेंसिंग, निगरानी प्रणाली और लक्ष्य पहचान तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। हाल के दिनों में पाकिस्तान ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और काउंटर-ड्रोन ग्रिड को भी सक्रिय किया है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ी सैन्य तैनाती
जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने अफगान सीमा से पांच बटालियनों को हटाकर एलओसी के रावलाकोट, कोटली और भीम्बर सेक्टर में तैनात किया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अतीत में इन्हीं इलाकों का उपयोग घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है। ऐसे में इन क्षेत्रों में बढ़ी सैन्य गतिविधियों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चीन और तुर्किये से मिल रही रणनीतिक मदद
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को चीन और तुर्किये से रक्षा सहयोग भी मिल रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक चीन ने पाकिस्तान को 36 मल्टी-रोल जे-सीरीज लड़ाकू विमान उपलब्ध कराए हैं। वहीं वर्ष के अंत तक पांचवीं पीढ़ी के जे-35 लड़ाकू विमान मिलने की भी संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर तुर्किये कराची के निकट संयुक्त कॉम्बैट ड्रोन असेंबली प्लांट स्थापित कर रहा है। यहां प्रतिवर्ष लगभग 700 ड्रोन तैयार किए जाएंगे। पाकिस्तान इन ड्रोन के निर्यात को लेकर भी समझौते कर चुका है। इसके अतिरिक्त तुर्किये पाकिस्तान के लिए मिलजैम श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण भी कर रहा है।
जल विवाद पर तीखे बयान
दो दिन पहले पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान की जल सुरक्षा को खतरा महसूस होने पर वह भारत के खिलाफ युद्ध जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सिंधु नदी प्रणाली के जल प्रवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है। गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत का स्पष्ट रुख है कि सीमा पार आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई होने तक संधि बहाल नहीं की जाएगी।
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