ईरान ने अमेरिका को दी चेतावनी: बोला- समझौता टूटा तो वॉशिंगटन होगा जिम्मेदार, हिजबुल्लाह ने भी दिखाई सख्ती

1 घंटा पहले
बोला- समझौता टूटा तो वॉशिंगटन होगा जिम्मेदार, हिजबुल्लाह ने भी दिखाई सख्ती

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने स्पष्ट किया है कि लेबनान समेत क्षेत्र के सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त कराने की जिम्मेदारी अमेरिका की है। ईरान ने चेतावनी दी है कि हालिया समझौते या युद्धविराम व्यवस्था का उल्लंघन होने पर इसके लिए वॉशिंगटन को जिम्मेदार माना जाएगा। वहीं, इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू होने की खबरों के कुछ घंटे बाद ही हिजबुल्लाह ने भी कड़ा रुख अपनाया। हिजबुल्लाह ने कहा कि वह किसी भी स्थिति में इजराइली कब्जे को स्वीकार नहीं करेगा।

रिपोर्ट के अनुसार विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार से टेलीफोन पर हुई बातचीत में यह बात कही। अराघची ने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति तभी संभव है, जब सभी मोर्चों पर संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो। साथ ही समझौते की शर्तों का ईमानदारी से पालन किया जाए।

हिजबुल्लाह बोला- कब्जे वाली जमीन की मुक्ति हमारा लक्ष्य

उधर, बेरूत में आयोजित एक कार्यक्रम में हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने कहा कि संगठन अपने मूल उद्देश्यों पर कायम है। कब्जे वाली जमीन को मुक्त कराने के लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह लेबनान के संविधान और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप कार्य करता है। किसी भी विदेशी प्रभुत्व को स्वीकार नहीं करता। कासिम ने यह भी कहा कि विरोधी पक्ष द्वारा हथियारों का इस्तेमाल किए जाने पर जवाब उसी की भाषा में दिया जाएगा।

सीजफायर के बावजूद दक्षिण लेबनान में हमले

युद्धविराम की घोषणा के बावजूद दक्षिण लेबनान में हिंसा थमती नजर नहीं आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार इजराइली हवाई हमलों और ड्रोन हमलों में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। नबातिएह क्षेत्र में रातभर कई स्थानों पर हमले किए गए। इनमें रिहायशी भवनों और घरों को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा इजराइली सेना द्वारा तोपों से गोलाबारी किए जाने की भी सूचना है।

समझौते की शर्तें पूरी होने के बाद ही आगे बढ़ेगी बातचीत

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन की प्रमुख शर्तों के लागू होने के बाद अंतिम समझौते पर औपचारिक बातचीत शुरू होगी। इनमें क्षेत्रीय संघर्षों की समाप्ति, होर्मुज स्ट्रेट से अमेरिकी नाकेबंदी हटाना, सुरक्षित समुद्री आवाजाही बहाल करना, प्रतिबंधों को समाप्त करना और फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करना शामिल है। बघाई ने कहा कि मध्यस्थ देशों के माध्यम से बातचीत और परामर्श का दौर जारी है। जैसे ही निर्धारित शर्तें पूरी होंगी, आगे की प्रक्रिया की सार्वजनिक घोषणा की जाएगी।

तेल निर्यात और होर्मुज से बढ़ सकती है आय

इस बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील मिलने और पूरी क्षमता से तेल निर्यात शुरू होने से उसे सालाना 105 अरब डॉलर तक की आय हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन 35 लाख बैरल तेल उत्पादन की स्थिति में ईरान को लगभग 9.9 लाख करोड़ रुपये वार्षिक राजस्व प्राप्त हो सकता है। वहीं, भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की स्थिति में अतिरिक्त आय की संभावना भी जताई गई है।

फीफा विश्व कप को लेकर भी विवाद

दूसरी ओर ईरानी फुटबॉल महासंघ ने फीफा विश्व कप आयोजकों पर भी भेदभाव का आरोप लगाया है। महासचिव हेदायत मोम्बेनी ने कहा कि ईरान की टीम के साथ किए गए व्यवहार ने खेल की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका आरोप है कि टीम को अमेरिका पहुंचने की अनुमति निर्धारित समय से पहले नहीं दी गई। हालांकि व्हाइट हाउस की फीफा टास्क फोर्स ने इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा है कि टीम को पहले से ही यात्रा संबंधी नियमों की जानकारी दे दी गई थी।

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