पंचर बनाने वाले के नाम पर फर्जी कंपनी: CGST ने भेजा समन, धोखाधड़ी की जांच शुरू

एम्स थाना क्षेत्र के रामपुर बुजुर्ग गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पंचर की छोटी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले एक युवक के नाम पर कथित तौर पर फर्जी कंपनी खोलकर करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाया गया। मामला तब उजागर हुआ जब सेंट्रल जीएसटी विभाग की ओर से युवक को समन जारी कर कंपनी के लगभग 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर और भारी कर देनदारी के संबंध में पूछताछ के लिए बुलाया गया। समन मिलने के बाद युवक और उसका परिवार सकते में आ गया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित राज प्रजापति ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि वर्ष 2024 में बहन की शादी के लिए उसे पैसों की आवश्यकता थी। इसी दौरान गांव के ही एक व्यक्ति ने आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिया। आरोप है कि सहायता के नाम पर उससे आधार कार्ड, पैन कार्ड समेत अन्य जरूरी दस्तावेज ले लिए गए। इसके अलावा कुछ कागजातों पर हस्ताक्षर भी कराए गए। दो बार वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। उस समय उसे किसी प्रकार की धोखाधड़ी का संदेह नहीं हुआ।
दस्तावेजों के आधार पर बनाई गई कथित फर्जी कंपनी
राज प्रजापति का आरोप है कि बाद में उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम से 'मेसर्स गड़जेट्रीक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी का पंजीकरण करा दिया गया। इतना ही नहीं, कंपनी के संचालन के लिए एक निजी बैंक में खाता भी खुलवा लिया गया। पीड़ित का कहना है कि उसे इस पूरी प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं थी और न ही उसका कंपनी के कारोबार से कोई संबंध है।
28 करोड़ टैक्स बकाया
जानकारी के अनुसार फरवरी 2026 में वाराणसी स्थित सीजीएसटी विभाग की जांच के दौरान इस कंपनी का मामला सामने आया। विभागीय जांच में कंपनी का लगभग 100 करोड़ रुपये का कारोबार दर्शाया गया। वहीं, उस पर करीब 28 करोड़ रुपये का कर बकाया पाया गया। बताया जा रहा है कि बड़े पैमाने पर कारोबार दिखाने के बाद कंपनी को बंद भी कर दिया गया था। मामले की जांच करते हुए मार्च 2026 में सीजीएसटी की टीम रामपुर बुजुर्ग स्थित पते पर पहुंची। वहां पहुंचकर अधिकारी उस समय हैरान रह गए, जब करोड़ों रुपये के कारोबार वाली कंपनी का कथित मालिक एक साधारण पंचर की दुकान चलाता मिला। राज प्रजापति ने अधिकारियों को अपनी पूरी स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद टीम बिना किसी कार्रवाई के लौट गई।
समन मिलने के बाद खुला मामला
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब 27 मई को वाराणसी सीजीएसटी कार्यालय की ओर से राज प्रजापति के नाम आधिकारिक समन जारी किया गया। समन में उन्हें 29 मई को कमिश्नर कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। नोटिस मिलने के बाद राज प्रजापति घबरा गए। पीड़ित ने 30 मई को एम्स थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनी बनाई गई। करोड़ों रुपये के कारोबार का रिकॉर्ड तैयार किया गया। उन्होंने मामले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस कर रही जांच
पुलिस का कहना है कि तहरीर के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। दस्तावेजों के इस्तेमाल, कंपनी के पंजीकरण और बैंक खाते से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच के बाद सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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