अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा: होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की क्षमता हुई मजबूत, फारस खाड़ी में फंसे 34 भारतीय जहाज

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह समाप्त होता नहीं दिख रहा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार हालिया संघर्ष के बाद ईरान की रणनीतिक क्षमता पहले की तुलना में और अधिक मजबूत हुई है। वह आवश्यकता पड़ने पर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावित करने की स्थिति में पहुंच गया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह क्षमता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े सामरिक हथियार से कम नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने आकलन किया है कि ईरान अब होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से होने वाली तेल और गैस आपूर्ति पर पहले से अधिक प्रभाव डाल सकता है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के ऊर्जा व्यापार की जीवनरेखा माना जाता है। जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि यदि परमाणु वार्ता विफल होती है तो ईरान यमन के हूती विद्रोहियों के जरिए बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में भी दबाव की स्थिति पैदा कर सकता है। इससे दुनिया के दो प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग एक साथ प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर इंटरनेशनल मार्केट पर पड़ेगा।
समझौते के लिए अमेरिका ने रखीं तीन प्रमुख शर्तें
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते की बुनियाद तीन प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित होगी। पहला, ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दूसरा, होर्मुज स्ट्रेट को हर परिस्थिति में खुला रखा जाएगा। तीसरा, यदि ईरान समझौते की शर्तों का पालन करता है तो उसे आर्थिक लाभ दिए जा सकते हैं। वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से ईरान को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता नहीं दी जाएगी। किसी भी निवेश की अनुमति केवल शर्तों के पूर्ण पालन के बाद ही दी जाएगी।
भारतीय जहाजों की आवाजाही पर नजर
तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण बना हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार भारत से जुड़े 34 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं और सुरक्षित मार्ग की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इनमें 16 जहाज उर्वरक लेकर भारत आने वाले हैं। इनमें यूरिया, डीएपी, सल्फर और अमोनिया से लदे पोत शामिल हैं। हालांकि शांति समझौते की घोषणा के बाद भारतीय एलएनजी टैंकर ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर चुका है। इससे अन्य जहाजों के लिए उम्मीद जगी है।
ड्रोन गतिविधियों और क्षेत्रीय राजनीति पर भी बढ़ी चिंता
इस बीच अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद भी ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा होर्मुज क्षेत्र में कई ड्रोन भेजे गए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इन ड्रोन को समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया। दूसरी ओर, हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने ईरान के समर्थन की सराहना करते हुए उसे न्याय और प्रतिरोध का प्रतीक बताया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। लेकिन क्षेत्र में सैन्य और रणनीतिक गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि पश्चिम एशिया की स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति आने वाले दिनों में इंटरनेशनल राजनीति का प्रमुख विषय बनी रह सकती है।
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