राजौरी में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़: जंगल में चल रहा कॉम्बिंग ऑपरेशन, ड्रोन से निगरानी

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में शनिवार दोपहर एक बार फिर आतंकवाद विरोधी अभियान तेज हो गया, जब दोरीमल के घने जंगलों में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इलाके में दो से तीन पाकिस्तानी आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। खुफिया इनपुट मिलने के बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। इसी दौरान जंगल में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई शुरू हुई। पूरे इलाके को घेरकर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ वाले इलाके में अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर दी है। पहाड़ी और घने जंगल वाले क्षेत्र में आतंकियों की तलाश के लिए ड्रोन और आधुनिक सर्विलांस उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकी लंबे समय से जंगलों में छिपे हो सकते हैं और सीमा पार से घुसपैठ के बाद किसी बड़ी वारदात की फिराक में थे। फिलहाल पूरे इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है और आम नागरिकों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है।
फरवरी में किश्तवाड़ से खत्म हुआ था आतंकी नेटवर्क
इसी साल फरवरी में भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर ने किश्तवाड़ में बड़े आतंकी नेटवर्क के खात्मे का दावा किया था। सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सात आतंकियों की तस्वीरें जारी करते हुए कहा था कि 326 दिनों तक चले ऑपरेशन के बाद इलाके से आतंक का नेटवर्क ध्वस्त कर दिया गया। इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर सैफुल्लाह भी मारा गया था, जिसे किश्तवाड़ क्षेत्र में आतंक गतिविधियों का मुख्य संचालक माना जाता था। सेना के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ और इंटेलिजेंस एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई की थी।
2026 में लगातार तेज हुए एंटी टेरर ऑपरेशन
साल 2026 में जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन चलाए गए हैं। जनवरी में शुरू हुए ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ के दौरान चतरू बेल्ट के जंगलों में कई दिनों तक मुठभेड़ चली थी, जिसमें तीन आतंकी मारे गए थे। वहीं फरवरी में बसंतगढ़ के जोफर फॉरेस्ट एरिया में ‘ऑपरेशन किया’ के तहत सुरक्षाबलों ने गुफा में छिपे आतंकियों पर अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर का इस्तेमाल कर उन्हें ढेर कर दिया था। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में आतंकियों की मौजूदगी खत्म करने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी सूरत में आतंक नेटवर्क को फिर से सक्रिय नहीं होने दिया जाएगा।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।









