25 मई से शुरू होगा नौतपा: 9 दिनों तक तपेगा उत्तर भारत, कृषि चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है नौतपा

मई का आखिरी सप्ताह शुरू होते ही उत्तर भारत में गर्मी ने अपने तेवर और तीखे कर दिए हैं। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में तापमान लगातार 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है। इसी बीच 25 मई से ‘नौतपा’ की शुरुआत होने जा रही है, जिसे साल के सबसे गर्म दिनों का दौर माना जाता है। इस वर्ष नौतपा 25 मई से 2 जून तक रहेगा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इन नौ दिनों में सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं, जिससे तापमान और उमस दोनों तेजी से बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि इस दौरान लू, हीटवेव और डिहाइड्रेशन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
क्या होता है नौतपा?
‘नौतपा’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों ‘नव’ और ‘तप’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है- नौ दिनों की भीषण तपिश। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जब सूर्य ज्येष्ठ मास में रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब नौतपा की शुरुआत होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो मई के अंतिम सप्ताह और जून की शुरुआत में सूर्य कर्क रेखा के बेहद करीब पहुंच जाता है। इस समय सूर्य की किरणें उत्तरी भारत के मैदानी इलाकों पर लगभग सीधी पड़ती हैं। दिन लंबे हो जाते हैं और धरती लगातार गर्मी सोखती रहती है। यही कारण है कि दिन ही नहीं, रात का तापमान भी 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तक बना रहता है।
सूरज, सूखी जमीन और लू बढ़ाते हैं खतरा
एक्सपर्ट के अनुसार नौतपा के दौरान धरती पहले से ही गर्म और सूखी हो चुकी होती है। मिट्टी में नमी कम होने के कारण वह तेजी से गर्म होती है और वातावरण का तापमान बढ़ा देती है। राजस्थान और पश्चिमी इलाकों से आने वाली गर्म पछुआ हवाएं यानी लू उत्तर भारत के बड़े हिस्से को झुलसा देती हैं। दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी भरी हवाएं भी उत्तर की ओर बढ़ने लगती हैं। इससे उमस बढ़ जाती है और शरीर का पसीना जल्दी नहीं सूखता। इसी वजह से ‘फील्स लाइक’ तापमान वास्तविक तापमान से कई डिग्री ज्यादा महसूस होता है।
खेती और मानसून से भी है गहरा संबंध
नौतपा को केवल गर्मी का दौर नहीं माना जाता, बल्कि इसका सीधा संबंध मानसून और खेती से भी जोड़ा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में मान्यता है कि जितना अधिक नौतपा तपेगा, मानसून उतना ही बेहतर होगा। मौसम वैज्ञानिकों का भी मानना है कि समुद्र की सतह गर्म होने से बादल बनने की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे मानसून को मजबूती मिलती है। खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अच्छी बारिश बेहद जरूरी होती है, इसलिए किसान नौतपा को कृषि चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
स्वास्थ्य पर पड़ता है सबसे ज्यादा असर
डॉक्टरों के अनुसार नौतपा के दौरान हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दे रहे हैं। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने, अधिक पानी पीने और ओआरएस, नींबू पानी या सत्तू का सेवन करने की सलाह दी जा रही है।
धार्मिक मान्यताओं में भी खास महत्व
भारतीय परंपरा में नौतपा को धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना गया है। इन दिनों सूर्य देव को जल अर्पित करने, जरूरतमंदों को शरबत, ठंडा पानी, फल और सत्तू दान करने की परंपरा है। कई लोग इस दौरान मांगलिक कार्यों से भी परहेज करते हैं। मान्यता है कि सूर्य की तपिश प्रकृति को संतुलित करती है और इसके बाद मानसून का आगमन जीवन में राहत लेकर आता है।
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