NEET पेपर लीक मामले में लातूर से डॉक्टर अरेस्ट: बेटे के लिए खरीदा था ‘गेस पेपर’, स्कूल-कॉलेज खोलने की तैयारी में था मुख्य आरोपी

2 घंटे पहले
बेटे के लिए खरीदा था ‘गेस पेपर’, स्कूल-कॉलेज खोलने की तैयारी में था मुख्य आरोपी

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो को बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने महाराष्ट्र के लातूर से एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। जिस पर अपने बेटे के लिए कथित तौर पर लीक ‘गेस पेपर’ खरीदने का आरोप है। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी डॉक्टर ने यह पेपर मामले के मुख्य आरोपी और आरसीसी कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगांवकर उर्फ ‘एम सर’ से हासिल किया था। इस हाई-प्रोफाइल मामले में किसी अभिभावक की यह पहली गिरफ्तारी मानी जा रही है। जिसने पूरे शिक्षा तंत्र और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक आरोपी डॉक्टर मनोज शिरुरे को पुणे में पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पेपर लीक गिरोह छात्रों और अभिभावकों से मोटी रकम लेकर कथित ‘गेस पेपर’ उपलब्ध कराता था। एजेंसी का दावा है कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और आर्थिक स्थिति के आधार पर सौदे तय किए जाते थे। सूत्रों के अनुसार गिरोह पहले अभिभावकों से टोकन मनी लेता था और बाकी भुगतान परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र की पुष्टि होने पर लिया जाता था। इसके लिए ब्लैंक चेक, दस्तावेज और अन्य निजी जानकारियां भी जमा कराई जाती थीं।

करोड़ों के नेटवर्क का खुलासा

जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी शिवराज मोटेगांवकर शिक्षा के नाम पर बड़ा नेटवर्क तैयार करने की योजना बना रहा था। सीबीआई को जानकारी मिली है कि आरोपी लातूर में करीब आठ एकड़ जमीन पर स्कूल और कॉलेज खोलने की तैयारी में था। एजेंसी अब इस बात की भी जांच कर रही है कि पेपर लीक से अर्जित धन का इस्तेमाल शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार में तो नहीं किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है और इसमें कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं।

11 आरोपी हो चुके हैं अरेस्ट

अब तक इस मामले में कुल 11 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इनमें सबसे ज्यादा सात आरोपी महाराष्ट्र से पकड़े गए हैं, जबकि राजस्थान और हरियाणा से भी आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। सीबीआई ने कई छात्रों और उनके अभिभावकों के यहां छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए हैं। जांच एजेंसी को यह भी पता चला है कि कुछ अभिभावकों ने परीक्षा के बाद रकम देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उन्हें लगा कि सभी सवाल असली पेपर से मेल नहीं खाते।

री-एग्जाम की तैयारी तेज

उधर, पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 21 जून को होने वाले री-एग्जाम की तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अधिकारियों के साथ बैठक कर परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने सोशल मीडिया और टेलीग्राम चैनलों पर फर्जी दावे फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। गौरतलब है कि NEET-UG परीक्षा तीन मई को देशभर के 551 शहरों और विदेशों के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद मामला तूल पकड़ता गया और अंततः परीक्षा रद्द करनी पड़ी। अब सीबीआई इस पूरे रैकेट के वित्तीय और तकनीकी नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हुई है।

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