अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के प्रथम दर्शन: छह से सात फीट का शिवलिंग आकार में आया, तीन जुलाई से शुरू होगी यात्रा

पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बाबा बर्फानी के प्रथम दर्शन की तस्वीरें शनिवार को सामने आने के बाद देशभर के श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ गया है। बर्फ से निर्मित शिवलिंग ने इस बार करीब 6 से 7 फीट का आकार ले लिया है। यात्रा शुरू होने से पहले सुरक्षा में तैनात जवानों ने सबसे पहले बाबा बर्फानी के दर्शन किए। हर वर्ष की तरह इस बार भी अमरनाथ यात्रा को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में जुटी हुई हैं।
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई 2026 से शुरू होकर नौ अगस्त 2026 तक चलेगी। यात्रा दो प्रमुख मार्गों- बालटाल-सोनमर्ग और पारंपरिक नुनवान-पहलगाम ट्रैक से संचालित होगी। रक्षा बंधन और सावन पूर्णिमा के दिन यात्रा का समापन होगा। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 3.6 लाख से अधिक श्रद्धालु यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना है।
बर्फ हटाने और ट्रैक बहाली का काम तेज
यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर अब भी भारी बर्फ जमी हुई है। सामान्य क्षेत्रों में छह से आठ फीट तथा हिमस्खलन प्रभावित इलाकों में 10 से 12 फीट तक बर्फ मौजूद है। सीमा सड़क संगठन लगातार मशीनों और कर्मचारियों की मदद से दोनों ट्रैक को बहाल करने में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि 15 जून तक दोनों रास्तों को पूरी तरह सुरक्षित और सुगम बना दिया जाएगा। बालटाल मार्ग पर करीब नौ किलोमीटर और नुनवान-पहलगाम मार्ग पर लगभग 8 किलोमीटर क्षेत्र से बर्फ हटाई जा चुकी है। इसके साथ ही ट्रैक को 12 फीट चौड़ा करने, रिटेनिंग वॉल और कल्वर्ट निर्माण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि इस बार यात्रियों को पहले की तुलना में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे बेस कैंप
इस बार यात्रा में श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था को अधिक आधुनिक और आरामदायक बनाया गया है। बेस कैंपों में पारंपरिक टेंट की जगह प्री-फैब्रिकेटेड और फाइबर स्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं। इन भवनों में 48 कमरे बनाए गए हैं, जिनमें अटैच्ड वॉशरूम, गर्म और ठंडे पानी की सुविधा तथा पैंट्री जैसी व्यवस्थाएं होंगी। प्रशासन का मानना है कि अचानक मौसम खराब होने या तापमान गिरने की स्थिति में ये संरचनाएं अधिक सुरक्षित साबित होंगी।
संवेदनशील क्षेत्रों को घोषित किया गया नो-एंट्री जोन
प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बादल फटने और अचानक बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों को ‘नो-एंट्री जोन’ घोषित किया है। संवेदनशील इलाकों में इस बार कैंप नहीं लगाए जाएंगे। दोनों यात्रा मार्गों पर पुलों और रास्तों को भी मजबूत किया गया है। यात्रा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और पूरे क्षेत्र में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जा रही है। श्रद्धालुओं से यात्रा पर निकलने से पहले मौसम और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।









