स्कूलों की किताबों में हाफिज सईद का महिमामंडन: जम्मू-कश्मीर में UAPA के तहत केस दर्ज, 8 अधिकारी सस्पेंड

1 घंटा पहले
जम्मू-कश्मीर में UAPA के तहत केस दर्ज, 8 अधिकारी सस्पेंड

जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए खरीदी गई दो पुस्तकों में आपत्तिजनक सामग्री मिलने के बाद बड़ा प्रशासनिक और कानूनी एक्शन हुआ है। मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड आतंकी हाफिज सईद, अलगाववादी नेता मकबूल भट समेत अन्य विवादित व्यक्तियों का महिमामंडन किए जाने के आरोप में पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, एक संविदा कर्मचारी की सेवा समाप्त कर दी गई है।

पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने मामला दर्ज कर विभिन्न स्थानों पर छापेमारी शुरू की। विवादित पुस्तकों में हिलाल अहमद और संतोष मीना की लिखी 'पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ J&K' और सुशांत गिरि की 'ग्रेट पर्सनैलिटी ऑफ जम्मू-कश्मीर' शामिल हैं। पहली पुस्तक का प्रकाशन जम्मू स्थित ओबेरॉय बुक सर्विस और दूसरी का प्रकाशन दिल्ली के अनुराग प्रकाशन ने किया है। अधिकारियों के अनुसार पहली पुस्तक की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में भेजी गई थीं, जबकि दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला के सरकारी स्कूलों में वितरित की गई थीं।

इन बिंदुओं पर उठा विवाद

इन पुस्तकों में जम्मू-कश्मीर को 'भारत अधिकृत कश्मीर' और 'भारत के कब्जे वाला कश्मीर' बताया गया है। प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के संस्थापक मकबूल भट को 'शहीद' के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह और मीरवाइज उमर फारूक को प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में वर्णित किया गया है। आतंकी हाफिज सईद को भी प्रमुख हस्तियों में शामिल किए जाने पर विवाद और गहरा गया।

भाजपा ने सरकार से की कार्रवाई की मांग

भारतीय जनता पार्टी ने पूरे मामले को 'एकेडमिक जिहाद' करार देते हुए दोनों पुस्तकों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पार्टी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से शिक्षा मंत्री के विरुद्ध भी कार्रवाई करने की मांग उठाई है।

पूर्व डीजीपी ने जताई गंभीर चिंता

जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने कहा कि मसरत आलम, सैयद अली शाह गिलानी और शब्बीर शाह जैसे लोगों ने पाकिस्तान की आईएसआई और वहां की सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी हस्तियों को महान नेता के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा तो नई पीढ़ी तक गलत संदेश पहुंचेगा। उन्होंने यह भी कहा कि किताब में मीरवाइज उमर फारूक को कश्मीर की आखिरी उम्मीद बताया गया है, जबकि इस तरह की सामग्री पाकिस्तान के एजेंडे को बढ़ावा देने वाली है।

प्रकाशक ब्लैकलिस्ट

स्कूल शिक्षा विभाग ने 'समग्र शिक्षा' लाइब्रेरी योजना के तहत 1832 सरकारी और 394 पीएम श्री स्कूलों के लिए इन पुस्तकों का चयन किया था। इसके लिए जम्मू और कश्मीर संभाग की चार विशेषज्ञ समितियों ने 364 प्रकाशकों की 463 पुस्तकों में से इनका चयन किया था। विवाद सामने आने के बाद विभाग ने दोनों पुस्तकों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का आदेश जारी कर दिया। आदेश में कहा गया कि पुस्तकों में अत्यंत आपत्तिजनक सामग्री है और चयन समिति तथा निगरानी अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही बरती है। दोनों लेखकों और प्रकाशकों को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित और ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। साथ ही उनकी प्रकाशित सभी सामग्री वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं।

30 दिन में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

मामले की जांच के लिए दो अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जिन्हें 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया है। वहीं उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। एक संविदा कर्मचारी की सेवा भी समाप्त कर दी गई है। पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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