प्रज्ञानानंदा ने फिर रचा इतिहास: नॉर्वे चेस में नंबर-1 कार्लसन को दोबारा चटाई धूल, आनंद के 19 साल पुराने रिकॉर्ड की बराबरी की

भारतीय शतरंज के युवा सितारे आर. प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस 2026 में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। 20 वर्षीय भारतीय ग्रैंडमास्टर ने टूर्नामेंट के आठवें दौर में विश्व के नंबर-1 खिलाड़ी और पांच बार के विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को पराजित किया। शतरंज जगत में अपनी प्रतिभा का एक बार फिर दमदार प्रदर्शन जारी रखा। खास बात यह रही कि प्रज्ञानानंदा ने महज सात दिनों के भीतर दूसरी बार कार्लसन को शिकस्त दी है। इससे पहले 28 मई को उन्होंने सफेद मोहरों से खेलते हुए नॉर्वे के दिग्गज खिलाड़ी को हराया था। वहीं इस बार उन्होंने काले मोहरों के साथ जीत दर्ज कर अपनी रणनीतिक क्षमता और मानसिक मजबूती का परिचय दिया।
इस शानदार जीत के साथ प्रज्ञानानंदा भारत के दूसरे ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं। जिन्होंने किसी एक टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को दो बार पराजित किया है। इससे पहले यह उपलब्धि भारतीय शतरंज के महान खिलाड़ी और पूर्व विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने हासिल की थी। आनंद ने वर्ष 2007 में प्रतिष्ठित लिनारेस इंटरनेशनल टूर्नामेंट में कार्लसन को लगातार दो मुकाबलों में मात दी थी। लगभग दो दशक बाद प्रज्ञानानंदा ने इस उपलब्धि को दोहराकर भारतीय शतरंज की नई पीढ़ी की ताकत का प्रदर्शन किया है। कार्लसन के खिलाफ मिली इस जीत ने न केवल टूर्नामेंट की अंक तालिका को रोमांचक बना दिया है। यह भी साबित कर दिया है कि प्रज्ञानानंदा अब विश्व शतरंज के शीर्ष खिलाड़ियों को लगातार चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।
गुकेश को फिरोजा से हार, वेस्ली सो शीर्ष पर कायम
आठवें दौर के अन्य मुकाबलों में मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश को निराशा का सामना करना पड़ा। फ्रांस के अलीरजा फिरोजा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गुकेश को पराजित कर महत्वपूर्ण अंक हासिल किए। एंडगेम में फिरोजा ने समय के दबाव का बेहतर उपयोग करते हुए जीत दर्ज की। इस जीत के साथ उनके 13 अंक हो गए हैं। वहीं, टूर्नामेंट में शीर्ष स्थान पर चल रहे अमेरिका के वेस्ली सो और जर्मनी के विंसेंट केमर के बीच क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहा। इसके बाद खेले गए अर्मागेडन मुकाबले में वेस्ली सो ने जीत दर्ज कर अतिरिक्त अंक हासिल किए। वेस्ली सो ने 14 अंकों के साथ अपनी बढ़त बरकरार रखी। प्रज्ञानानंदा 12 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर बने हुए हैं और खिताबी दौड़ में मजबूती से शामिल हैं।
महिला वर्ग में मिला-जुला प्रदर्शन
नॉर्वे चेस महिला वर्ग में भारत के लिए दिन मिश्रित रहा। युवा भारतीय खिलाड़ी दिव्या देशमुख को टूर्नामेंट की शीर्ष खिलाड़ी बिबिसारा असाउबायेवा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। काले मोहरों से खेल रही बिबिसारा ने पूरे मुकाबले में दबाव बनाए रखा। समय संकट का लाभ उठाकर जीत दर्ज की। दूसरी ओर भारत की अनुभवी ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी ने अन्ना मुजीचुक के खिलाफ क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ खेलने के बाद अर्मागेडन गेम में शानदार जीत हासिल की। इस जीत से हम्पी ने महत्वपूर्ण अतिरिक्त अंक अर्जित किए। महिला वर्ग की अंक तालिका में बिबिसारा असाउबायेवा 15.5 अंकों के साथ शीर्ष पर हैं। जबकि अन्ना मुजीचुक दूसरे और दिव्या देशमुख तीसरे स्थान पर बनी हुई हैं।
अर्मागेडन फॉर्मेट बना आकर्षण का केंद्र
25 मई से पांच जून तक ओस्लो में आयोजित नॉर्वे चेस टूर्नामेंट का सबसे आकर्षक पहलू इसका अर्मागेडन फॉर्मेट है। यदि क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहता है तो विजेता तय करने के लिए अर्मागेडन मुकाबला खेला जाता है। इस फॉर्मेट में सफेद मोहरों वाले खिलाड़ी को अधिक समय मिलता है। उसे जीत अनिवार्य रूप से हासिल करनी होती है। यदि मुकाबला ड्रॉ रहता है तो काले मोहरों वाला खिलाड़ी विजेता घोषित किया जाता है। यही कारण है कि टूर्नामेंट का हर दौर अंतिम क्षण तक रोमांच और प्रतिस्पर्धा से भरपूर बना रहता है।
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