स्पाइसजेट पर GST विभाग का शिकंजा: 125 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस जारी, रजिस्ट्रेशन रद्द होने का खतरा

7 घंटे पहले
125 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस जारी, रजिस्ट्रेशन रद्द होने का खतरा

आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही बजट एयरलाइन स्पाइसजेट की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग ने एयरलाइन को करीब 125 करोड़ रुपये का टैक्स डिमांड नोटिस जारी किया है। विभाग का आरोप है कि कंपनी ने कई महीनों तक समय पर जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किया है। जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही स्पाइसजेट का जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

अधिकारियों के अनुसार, एयरलाइन को पहले भी कई बार नियमों का पालन करने और लंबित रिटर्न दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे। लगातार देरी और अनियमितताओं के कारण विभाग को कड़ा कदम उठाना पड़ा। जीएसटी विभाग ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। रजिस्ट्रेशन रद्द करने का प्रस्ताव भी रखा है।

अलग-अलग महीनों का बकाया जोड़कर निकली बड़ी देनदारी

विभागीय आकलन के अनुसार स्पाइसजेट पर नवंबर से मार्च तक के विभिन्न कर अवधियों का कुल 124.65 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें नवंबर माह का 44.44 करोड़ रुपये, दिसंबर का 43.79 करोड़ रुपये, जनवरी का 12.19 करोड़ रुपये, फरवरी का 12.10 करोड़ रुपये और मार्च का 12.12 करोड़ रुपये टैक्स बकाया शामिल है। जीएसटी अधिकारियों का कहना है कि कंपनी द्वारा रिटर्न दाखिल करने में लगातार अनियमितता बरती गई। जिसके बाद केंद्रीय और राज्य जीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 62 के तहत उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रोविजनल असेसमेंट किया गया। इसी प्रक्रिया के बाद यह डिमांड नोटिस जारी किया गया है।

25 मई को जारी हुआ था कारण बताओ नोटिस

जानकारी के अनुसार, स्पाइसजेट को 25 मई 2026 को ही शो-कॉज नोटिस भेजा गया था। नोटिस में कंपनी को लंबित अनुपालनों को पूरा करने और निर्धारित समय के भीतर जवाब देने का अवसर दिया गया था। हालांकि अब तक आवश्यक दस्तावेज और रिटर्न दाखिल नहीं किए गए हैं। विभाग के एक सीनियर अफसर ने कहा कि यदि कंपनी जल्द ही अपने लंबित रिटर्न दाखिल नहीं करती और कानूनी दायित्वों का पालन नहीं करती है, तो जीएसटी कानून के तहत आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

क्या है धारा 62 का प्रावधान?

जीएसटी अधिनियम की धारा 62 के तहत यदि कोई पंजीकृत करदाता निर्धारित समय में रिटर्न दाखिल नहीं करता है, तो कर अधिकारी उपलब्ध सूचनाओं और रिकॉर्ड के आधार पर स्वयं कर का आकलन कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित करदाता को टैक्स डिमांड नोटिस जारी किया जाता है।

रजिस्ट्रेशन रद्द होने से बढ़ सकती हैं मुश्किलें

एक्सपर्ट्स के अनुसार यदि किसी कंपनी का जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है, तो उसकी व्यावसायिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं। कंपनी कानूनी रूप से टैक्स संग्रह नहीं कर पाएगी। कई कारोबारी प्रक्रियाओं में बाधा उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में स्पाइसजेट के लिए यह मामला केवल टैक्स विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके परिचालन और कारोबारी भविष्य से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

नव्य जागरण

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