ईरान जंग में अमेरिका को बड़ा नुकसान: 42 एयरक्राफ्ट और ड्रोन तबाह, ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ पर 2.81 लाख करोड़ रुपये खर्च

ईरान के खिलाफ चलाए गए अमेरिकी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध अभियान में अमेरिका को भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जंग के दौरान अमेरिकी सेना के कुल 42 एयरक्राफ्ट और ड्रोन या तो पूरी तरह तबाह हो गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें अत्याधुनिक लड़ाकू विमान एफ-35 सहित कई फाइटर जेट और ड्रोन शामिल हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पहले ही स्वीकार कर चुका है कि इस युद्ध अभियान पर लगभग 2.81 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक नुकसान ड्रोन कैटेगरी में हुआ है। कुल 25 ड्रोन तबाह हुए, जिनमें 24 एमक्यू-9 रीपर और एक एमक्यू-4C ट्राइटन शामिल है। इसके अलावा छह फाइटर और अटैक जेट भी नष्ट हुए हैं। इनमें एक एफ-35 Lightning II, चार एफ-15ई स्ट्राइक ईगल और एक ए-10 थंडरबोल्ट II शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 11 अन्य विमान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
तख्तापलट की साजिश के दावे से बढ़ी हलचल
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स ने इस युद्ध को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इजराइल का उद्देश्य केवल ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना नहीं था, बल्कि वहां सत्ता परिवर्तन की योजना भी तैयार की गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पूर्व ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को संभावित नए नेतृत्व के रूप में आगे लाने की योजना बनाई गई थी। कथित तौर पर युद्ध के शुरुआती चरण में तेहरान में अहमदीनेजाद के घर के पास हमला भी किया गया, हालांकि वे सुरक्षित बच निकले।
तीन चरणों में अंजाम देने की बनाई थी रणनीति
रिपोर्ट के अनुसार इस कथित योजना को तीन चरणों में अंजाम देने की रणनीति बनाई गई थी। पहले चरण में ताबड़तोड़ हवाई हमलों और शीर्ष नेताओं को निशाना बनाकर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की गई। दूसरे चरण में देश में अराजकता और युद्ध जैसे हालात पैदा कर सरकार को कमजोर दिखाने की रणनीति थी। तीसरे चरण में गैस और बिजली जैसी बुनियादी सेवाओं को प्रभावित कर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की योजना बनाई गई थी।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक असर
युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में संकट और गहराता है तो दुनिया में खाद्य संकट और महंगाई बढ़ सकती है। वहीं श्रीलंका के चाय उद्योग पर भी इस युद्ध का असर पड़ा है। निर्यात घटने और ऊर्जा लागत बढ़ने से वहां के उद्योगों और मजदूरों पर दबाव बढ़ गया है।
ईरानी सैन्य अधिकारियों ने दी चेतावनी
उधर ईरान ने दावा किया है कि उसके पास अब भी कई आधुनिक और गुप्त हथियार मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल अब तक युद्ध में नहीं किया गया है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि दोबारा हमला हुआ तो जवाब पहले से अधिक आक्रामक होगा। वहीं ईरान ने यह भी कहा है कि वह अमेरिका की ओर से आए नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है और संभावित सीजफायर को लेकर बातचीत जारी है। इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है तथा दुनिया की निगाहें अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।
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