प्लेटलेट्स नॉर्मल होने पर भी खतरनाक हो सकता है डेंगू: फीवर कम होने के बाद भी निगरानी जरूरी, डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनी

निवेदिता चंद|16 मई 2026
 फीवर कम होने के बाद भी निगरानी जरूरी, डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनी

हर साल 16 मई को नेशनल डेंगू डे मनाया जाता है। इस दिन लोगों को डेंगू के प्रति जागरूक किया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू को लेकर लोगों में कई गलतफहमियां फैली हुई हैं। सबसे बड़ी गलतफहमी प्लेटलेट्स को लेकर है। ज्यादातर लोग मानते हैं कि प्लेटलेट्स कम होने पर ही डेंगू खतरनाक होता है। जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

मेदांता नोएडा के इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. सौरदीप चौधरी ने बड़ी चेतावनी दी है। उनके मुताबिक प्लेटलेट्स सामान्य होने पर भी डेंगू गंभीर हो सकता है। कई लोग सिर्फ ब्लड रिपोर्ट देखकर राहत महसूस करते हैं। इसी वजह से बीमारी के खतरनाक संकेत नजरअंदाज हो जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू में मरीज की पूरी शारीरिक स्थिति देखना जरूरी होता है।

प्लेटलेट्स ठीक होने के बाद भी बढ़ सकता है खतरा

डेंगू एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह वायरस हर मरीज को अलग तरह प्रभावित करता है। कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स सामान्य रहते हैं। इसके बावजूद हालत गंभीर हो सकते है। डॉक्टरों के अनुसार कई मरीजों में प्लाज्मा लीकेज शुरू हो जाता है। कुछ मामलों में शरीर के अंदर ब्लीडिंग होने लगती है। इसके अलावा लिवर से जुड़ी दिक्कतें भी सामने आती हैं। कई मरीजों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। कुछ लोग डेंगू शॉक सिंड्रोम का शिकार हो जाते हैं। ऐसे हालात जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। डॉक्टरों ने कहा कि सिर्फ प्लेटलेट्स के नंबर देखकर बीमारी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

एक्सपर्ट्स ने डेंगू के कई गंभीर लक्षण बताए हैं। लगातार उल्टी होना बड़ा खतरे का संकेत माना जाता है। पेट में तेज दर्द भी गंभीर स्थिति दिखाता है। जरूरत से ज्यादा कमजोरी महसूस होना भी चिंता बढ़ा सकता है। मरीज को बेचैनी और घबराहट होने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। नाक और मसूड़ों से खून आना भी खतरनाक संकेत है। पेशाब कम होना शरीर में डिहाइड्रेशन दिखाता है। सांस फूलने की समस्या भी गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखने पर लापरवाही बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। समय रहते इलाज शुरू करना जरूरी होता है।

बुखार उतरने के बाद बढ़ जाता है खतरा

डॉक्टरों ने डेंगू के सबसे क्रिटिकल फेज को लेकर भी चेताया है। आमतौर पर लोग बुखार उतरते ही राहत महसूस करने लगते हैं। कई परिवार मान लेते हैं कि मरीज अब ठीक हो रहा है। लेकिन डेंगू में यही समय सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक बीमारी का तीसरा से सातवां दिन बेहद अहम होता है। इसी दौरान शरीर में गंभीर जटिलताएं शुरू हो सकती हैं। मरीज की हालत अचानक बिगड़ सकती है। इसलिए बुखार कम होने के बाद भी निगरानी जरूरी रहती है। डॉक्टरों ने कहा कि इस समय मरीज को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।

हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं

डेंगू को लेकर प्लेटलेट्स चढ़ाने का डर भी लोगों में बहुत ज्यादा है। डॉक्टरों ने साफ किया कि हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। इसका फैसला सिर्फ प्लेटलेट्स की संख्या देखकर नहीं लिया जाता। डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति का मूल्यांकन करते हैं। ब्लड प्रेशर, डिहाइड्रेशन और ब्लीडिंग के लक्षण देखे जाते हैं। शरीर के अन्य अंगों की स्थिति भी जांची जाती है। इसके बाद ही प्लेटलेट्स चढ़ाने का फैसला लिया जाता है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि बिना जरूरत प्लेटलेट्स चढ़ाना भी नुकसान पहुंचा सकता है।

मानसून में बढ़ते हैं डेंगू के मामले

डॉक्टरों के अनुसार मानसून के दौरान डेंगू तेजी से फैलता है। इस मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। पूरी बाजू के कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों ने मरीजों को भरपूर आराम करने की सलाह दी है। शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेने से बचना चाहिए। खासतौर पर इबुप्रोफेन और एस्पिरिन जैसी दवाएं नहीं लेनी चाहिए। इन दवाओं से इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि शुरुआती लक्षण पहचानना ही सबसे बड़ा बचाव है।

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