लालू-राबड़ी की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव: तेज प्रताप की भी सुरक्षा घटी, बंगला खाली करने को 15 दिन का अल्टीमेटम

बिहार की राजनीति में सुरक्षा और सरकारी आवास को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया है। उनकी जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा समाप्त कर दी है। सरकार ने दोनों नेताओं को अब विशेष पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। वहीं, पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की वाई श्रेणी की सुरक्षा भी वापस ले ली गई है। उन्हें केवल एक निजी सुरक्षा कर्मी उपलब्ध कराया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को खाली कराने को लेकर सरकार और लालू परिवार के बीच विवाद गहराता जा रहा है।
सरकारी आदेश के अनुसार, लालू प्रसाद यादव को अब बिहार पुलिस की विशेष सुरक्षा व्यवस्था प्रदान की जाएगी। जिसमें एस्कॉर्ट वाहन, बुलेटप्रूफ कार, पायलट वाहन और आवश्यक संख्या में सुरक्षाकर्मी शामिल होंगे। वहीं राबड़ी देवी को महिला बॉडीगार्ड, वर्दीधारी सुरक्षाकर्मी, एस्कॉर्ट और बुलेटप्रूफ वाहन सहित विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। दूसरी ओर, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्हें पहले की तरह वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। राजद सांसद मीसा भारती तथा तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री की सुरक्षा भी पूर्ववत रखी गई है।
बंगला विवाद ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान
सुरक्षा में कटौती के साथ-साथ 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को लेकर भी विवाद तेज हो गया है। भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को आवास खाली करने के लिए 15 दिनों का अंतिम नोटिस जारी किया है। विभाग का कहना है कि विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राबड़ी देवी को पहले ही 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया जा चुका है। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अब तक पुराना आवास खाली नहीं किया है। सरकार का दावा है कि कई बार अनुरोध के बावजूद आवास खाली नहीं किया गया। जिसके बाद दोबारा नोटिस जारी किया गया है।
सरकार और राजद आमने-सामने
आवास विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। राबड़ी देवी ने स्पष्ट कहा है कि वे स्वेच्छा से आवास खाली नहीं करेंगी। यदि सरकार चाहती है तो बल प्रयोग कर उन्हें हटाए। वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकारी बंगला किसी की निजी संपत्ति नहीं होता और न ही यह किसी की बपौती है। उन्होंने कहा कि सरकारी आवास नियमों के अनुसार आवंटित और खाली कराए जाते हैं। सभी जनप्रतिनिधियों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और आवास विवाद आगामी दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष इस कार्रवाई को राजनीतिक दृष्टिकोण से देख रहा है। जबकि सरकार इसे प्रशासनिक और नियमसम्मत निर्णय बता रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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