बिहार में अवैध हथियारों के रैकेट का भंडाफोड़: चार जिलों में एक साथ छापेमारी, मास्टरमाइंड समेत 4 अरेस्ट

पूर्वी चंपारण जिले में पुलिस ने अवैध कारतूस निर्माण के बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए चार जिलों में एक साथ कार्रवाई की। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में हुई छापेमारी में गिरोह के सरगना समेत चार आरोपियों को अरेस्ट किया गया। कार्रवाई के दौरान एक हजार से अधिक निर्मित और अर्धनिर्मित कारतूस, हथियार बनाने के उपकरण, भारी मात्रा में बारूद और विस्फोटक रसायन बरामद किए गए। पुलिस का दावा है कि गिरोह का नेटवर्क उत्तर बिहार के कई जिलों तक फैला हुआ है और उससे जुड़े अन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई जारी है।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि जिले में अवैध रूप से कारतूस तैयार किए जा रहे हैं। इसके बाद विशेष टीम गठित कर चकिया, फेनहारा, मधुबन और गड़हिया थाना क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी की गई। अभियान में चकिया और पकड़ीदयाल के एसडीपीओ के नेतृत्व में पांच थानों की पुलिस शामिल रही। साक्ष्य जुटाने के लिए जिला खुफिया इकाई (डीआईयू) और विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीमों को भी मौके पर लगाया गया।
कारखाने से भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद
चकिया के एसडीपीओ संतोष कुमार ने बताया कि कार्रवाई के दौरान एक हजार से अधिक निर्मित और अर्धनिर्मित कारतूस बरामद किए गए। इसके अलावा दो देसी कट्टे, 205 जिंदा कारतूस, 1063 खाली कारतूस और .303 बोर के पिलेट भी जब्त किए गए। तलाशी के दौरान सात अर्धनिर्मित मैगजीन, दो अर्धनिर्मित पिस्तौल के बैरल, मेटल शीट, लेथ मशीन और कारतूस निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण भी मिले। पुलिस ने मौके से गन पाउडर और बड़ी मात्रा में विस्फोटक रसायन भी बरामद किए हैं।
खतरनाक रसायनों के बीच चल रहा था अवैध कारोबार
जांच में सामने आया कि कारखाने में नाइट्रिक एसिड, रेड फास्फोरस, एसीटोन और चारकोल जैसे रसायनों का इस्तेमाल बारूद तैयार करने के लिए किया जा रहा था। इन खतरनाक पदार्थों की बरामदगी के बाद पुलिस ने पूरे परिसर को सील कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, बरामद सामग्री से बड़े पैमाने पर कारतूस तैयार किए जाते थे।
अन्य संदिग्ध ठिकानों पर भी छापेमारी जारी
पुलिस ने गिरोह के कथित सरगना श्रीकांत सिंह निवासी मड़पा मोहन, थाना फेनहारा को गिरफ्तार किया है। उसके अलावा गड़हिया निवासी रामबाबू पासवान, मधुबन निवासी वसी आलम उर्फ मुन्ना और रहमत मियां भी पुलिस की गिरफ्त में आए हैं। पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर अन्य संदिग्ध ठिकानों पर भी छापेमारी जारी है।
एनएच किनारे किराए के मकान में बनाया था ठिकाना
प्रारंभिक जांच में पता चला कि गिरोह ने चकिया के ओझा टोला में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे दयाशंकर ठाकुर का मकान किराए पर लेकर उसे कारतूस निर्माण का अड्डा बना रखा था। पुलिस का मानना है कि मुख्य मार्ग के पास होने के कारण यहां तैयार माल को आसानी से विभिन्न जिलों तक पहुंचाया जाता था। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में बड़े अवैध नेटवर्क का खुलासा हुआ है। गिरोह के तार उत्तर बिहार के कई जिलों से जुड़े मिले हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की कार्रवाई जारी है।
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