कचरा प्रबंधन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: आज होगी राज्यों की तैयारी की समीक्षा, घरों में चार तरह से कचरा अलग करना होगा अनिवार्य

नई दिल्ली|1 घंटा पहले
आज होगी राज्यों की तैयारी की समीक्षा, घरों में चार तरह से कचरा अलग करना होगा अनिवार्य

देशभर में बढ़ते प्रदूषण और कचरा प्रबंधन की बिगड़ती स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच सोमवार को ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के पालन की समीक्षा करेगी। अदालत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अब हालात “अब या कभी नहीं” जैसे हैं और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करना सरकार के साथ-साथ नागरिकों की भी जिम्मेदारी है। इसी क्रम में केंद्र सरकार से राज्यों की प्रगति रिपोर्ट 24 मई तक मांगी गई थी, जिस पर आज सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पांच मई की पिछली सुनवाई में निर्देश दिया था कि घरों, संस्थानों और हाउसिंग सोसायटियों में कचरे को स्रोत स्तर पर ही चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटना अनिवार्य किया जाए। अदालत ने कहा था कि गीले और सूखे कचरे के साथ ई-वेस्ट तथा घरेलू खतरनाक कचरे को भी अलग-अलग रखना जरूरी होगा। अदालत का मानना है कि यदि शुरुआती स्तर पर कचरे का पृथक्करण नहीं हुआ, तो वैज्ञानिक निस्तारण और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया प्रभावी नहीं हो पाएगी।

हर जिले में बनेगी स्पेशल सेल

सुप्रीम कोर्ट ने नियमों के सख्त पालन के लिए जिला प्रशासन को सीधे जिम्मेदार बनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 के तहत जिला कलेक्टरों को विशेष अधिकार देने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत हर जिले में एक स्पेशल सेल गठित की जाएगी, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी शामिल होंगे। यह सेल बड़े कचरा उत्पादकों और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। कोर्ट ने साफ किया है कि गंभीर मामलों में बिजली और पानी के कनेक्शन काटने जैसे कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं। इसके अलावा जिला स्तर से हर 15 दिन में राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी और राज्य सरकारें हर महीने केंद्र को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि कचरा प्रबंधन व्यवस्था फेल होती है तो संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।

हर वार्ड में होगी निगरानी व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत अब हर वार्ड में स्वच्छता समितियों का गठन किया जाएगा। इनमें स्थानीय पार्षदों के साथ नागरिक प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। नगर निगम के सफाई सुपरवाइजर उन लोगों के खिलाफ चालान कर सकेंगे, जो गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करके नहीं देंगे। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में डिजिटल और तकनीकी निगरानी की व्यवस्था की जाएगी। हर क्षेत्र में आरआरआर सेंटर यानी ‘रिड्यूस-रीयूज-रीसायकल’ केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां पुराने कपड़े, किताबें और इलेक्ट्रॉनिक सामान जमा किए जा सकेंगे। इन वस्तुओं का पुनः उपयोग या रीसाइक्लिंग की जाएगी।

नियम न मानने पर फंडिंग पर असर

अदालत ने यह भी कहा है कि शहरी निकायों को अपने कुल बजट का एक हिस्सा सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन पर खर्च करना होगा। जो निकाय इन नियमों को लागू नहीं करेंगे, उनकी केंद्रीय और राज्य स्तरीय ग्रांट प्रभावित हो सकती है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि खुले में कचरा फेंकने पर रोक लगाई जाए और कचरे का परिवहन केवल बंद एवं कवर्ड वाहनों में ही किया जाए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती देश के शहरी ढांचे और पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ा कदम साबित हो सकती है। यदि राज्यों और स्थानीय निकायों ने प्रभावी तरीके से इन नियमों को लागू किया, तो आने वाले वर्षों में स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।

नव्य जागरण

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