UP में पाकिस्तान का ‘डिजिटल जिहाद’ नेटवर्क बेनकाब: इंस्टाग्राम से बन रहे थे स्लीपर सेल, ATS ने सीरियल ब्लास्ट और पुलिस मर्डर प्लान का किया खुलासा

बाराबंकी|07 मई 2026
इंस्टाग्राम से बन रहे थे स्लीपर सेल, ATS ने सीरियल ब्लास्ट और पुलिस मर्डर प्लान का किया खुलासा

उत्तर प्रदेश में एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने एक ऐसे खतरनाक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। यह कोई पारंपरिक आतंकी नेटवर्क नहीं था। यह सोशल मीडिया के जरिए तैयार हो रहा नया “डिजिटल टेरर मॉड्यूल” था, जिसमें इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भारतीय युवाओं को कट्टरपंथ और हिंसा की तरफ धकेला जा रहा था।

ATS ने बाराबंकी के दानियाल अशरफ और कुशीनगर के कृष्णा मिश्रा को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि दोनों पाकिस्तान से जुड़े गैंगस्टर और आतंकी नेटवर्क के संपर्क में थे। उन्हें देश में सीरियल ब्लास्ट कराने, पुलिसकर्मियों की हत्या करने और दहशत फैलाने का टास्क दिया गया था। पूछताछ में जो खुलासे हुए, वे बेहद खौफनाक हैं। पाकिस्तान से बैठे हैंडलर्स इन युवाओं को “हीरो” बनाने का सपना दिखा रहे थे। उन्हें पैसा, हथियार और पहचान का लालच दिया जा रहा था। सोशल मीडिया पर दोस्ती की गई। फिर धीरे-धीरे कट्टरपंथी कंटेंट भेजा गया। इसके बाद उन्हें “फुट सोल्जर” और “स्लीपर सेल” की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी शुरू हो गई।

“काम करोगे तो इंडिया में हीरो बना दूंगा”

ATS की पूछताछ में सामने आया कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी लगातार इन युवाओं के संपर्क में था। उसने दानियाल और कृष्णा से कहा था- “मेरे कहने के मुताबिक काम करोगे तो मैं तुम्हें इंडिया में हीरो बना दूंगा।” यही वह लाइन थी, जिसने जांच एजेंसियों को सबसे ज्यादा चौंकाया। आतंकी संगठन अब युवाओं को धार्मिक कट्टरता के साथ-साथ “गैंगस्टर ग्लैमर” भी बेच रहे हैं। सोशल मीडिया पर अपराधियों को स्टाइल आइकन की तरह दिखाया जा रहा है। हथियारों, लग्जरी लाइफ और डर पैदा करने वाली छवि के जरिए युवाओं को आकर्षित किया जा रहा है। ATS को आरोपियों के मोबाइल से वीडियो कॉल रिकॉर्ड, वॉइस नोट्स, इंस्टाग्राम चैट, व्हाट्सएप मैसेज और देश विरोधी कंटेंट मिला है। इनमें भारत विरोधी बातचीत, हमले की प्लानिंग और टारगेट चुनने जैसी बातें शामिल हैं।

इंस्टाग्राम बना आतंक का नया अड्डा

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा सोशल मीडिया को लेकर हुआ है। ATS के मुताबिक पाकिस्तानी हैंडलर्स इंस्टाग्राम के जरिए भारतीय युवाओं तक पहुंच बना रहे थे। पहले फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी जाती थी। फिर बातचीत शुरू होती थी। धीरे-धीरे भरोसा कायम किया जाता था। इसके बाद युवाओं को “मिशन”, “जिहाद”, “रिवेंज” और “हीरो बनने” जैसे नैरेटिव पर तैयार किया जाता था। उन्हें यह एहसास कराया जाता था कि वे किसी बड़े मिशन का हिस्सा हैं। बदले में पैसे और विदेश भेजने का लालच भी दिया जाता था। एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ दो युवाओं का मामला नहीं है। यह एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है, जो अलग-अलग राज्यों में युवाओं को डिजिटल तरीके से रैडिकलाइज कर रहा है।

पुलिस स्टेशन की रेकी… गन की डिमांड… हमले की पूरी तैयारी

दानियाल अशरफ सिर्फ चैटिंग तक सीमित नहीं था। उसने एक पुलिस स्टेशन की रेकी की थी। उसका वीडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजा गया। जांच में पता चला कि दानियाल ने हमले को अंजाम देने के लिए पैसे और हथियार मांगे थे। उसने गन की डिमांड की थी। वहीं हम्माद नाम के हैंडलर ने आबिद जट की “पाकिस्तानी डॉन” लिखी तस्वीर भेजी थी। निर्देश था कि उसकी 50 कॉपियां छपवाकर अलग-अलग जगहों पर चिपकाई जाएं ताकि दहशत फैलाई जा सके। यह सिर्फ हिंसा नहीं थी। यह मनोवैज्ञानिक आतंक फैलाने की रणनीति थी।

कृष्णा मिश्रा को मिला था “मर्डर टास्क”

ATS जांच में सबसे चौंकाने वाला हिस्सा कृष्णा मिश्रा से जुड़ा है। उसके मोबाइल में ऐसे वीडियो मिले हैं, जिनमें पाकिस्तानी हैंडलर्स ने साफ कहा था कि किसी वर्दीधारी व्यक्ति को गोली मारो और उसका वीडियो भेजो। यानी यह सीधे-सीधे पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की साजिश थी। कृष्णा और उसके साथियों को टारगेट किलिंग का टास्क दिया गया था। रेकी वीडियो भी बरामद हुआ है। जांच एजेंसियों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो कोई बड़ा हमला हो सकता था।

इकलौता बेटा है कृष्णा

कृष्णा मिश्रा की कहानी बेहद चौंकाने वाली है। वह कुशीनगर के एक सामान्य परिवार से आता है। पिता छोटेलाल मिश्रा आर्थिक तंगी से जूझते रहे। शराब की लत ने परिवार की हालत और खराब कर दी। कृष्णा की पढ़ाई सिर्फ तीसरी-चौथी तक ही हो सकी। परिवार वालों के मुताबिक वह दिल्ली में किसी कंपनी में काम कर रहा था। लेकिन इसी दौरान वह सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में आ गया। कृष्णा अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। परिवार को अंदाजा तक नहीं था कि वह किस रास्ते पर जा चुका है। ATS ने उसे पांच मई को गोरखपुर से उठाया था।

दानियाल की दुबई जाने की तैयारी

दानियाल अशरफ बाराबंकी का रहने वाला है। उसका परिवार खेती करता है। वह मुंबई में कढ़ाई का काम सीख रहा था और सऊदी अरब जाने की तैयारी में था। उसका पासपोर्ट भी बन चुका था। परिवार के मुताबिक बुधवार सुबह कुछ लोग सादी वर्दी में घर पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसी मारपीट के मामले में पूछताछ करनी है। फिर दानियाल को अपने साथ ले गए। बाद में परिवार को पता चला कि उसे ATS ने गिरफ्तार किया है। परिवार का दावा है कि उन्हें बेटे की गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी। लेकिन ATS को उसके फोन से कई ऐसे सबूत मिले हैं, जो सीधे आतंकी मॉड्यूल से कनेक्शन दिखाते हैं।

बरामद हुए हथियार

ATS ने दोनों आरोपियों के पास से हथियार और कारतूस भी बरामद किए हैं। इनमें एक नाइन एमएम देशी पिस्तौल, एक 315 बोर तमंचा, छह जिंदा कारतूस, दो मोबाइल फोन शामिल हैं। मोबाइल फोन में मौजूद डेटा ने जांच एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। अब ATS इस नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों की तलाश कर रही है।

2 महीने में 12 संदिग्ध… यूपी बना नया टारगेट?

बीते दो महीनों में यूपी से 12 संदिग्ध आतंकी या मॉड्यूल से जुड़े लोग पकड़े जा चुके हैं। चार अप्रैल को लखनऊ से चार संदिग्ध गिरफ्तार हुए थे। पूछताछ में खुलासा हुआ था कि पाकिस्तान से उन्हें “दहशत फैलाओ, पैसा कमाओ” का ऑफर मिला था। वे बाइक और पिकअप में आग लगाकर उसका वीडियो पाकिस्तान भेजते थे। हर आगजनी पर उन्हें 12 हजार रुपए मिलते थे। 24 अप्रैल को मेरठ और दिल्ली से पकड़े गए दो अन्य संदिग्ध भी शहजाद भट्टी और आबिद जट के संपर्क में थे। उन्हें एक्स मुस्लिम लोगों की टारगेट किलिंग के लिए 3 लाख रुपए का ऑफर दिया गया था। इन लगातार गिरफ्तारियों ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क अब यूपी को बड़े ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल करना चाहता है।

देश के सामने नया खतरा- ‘ऑनलाइन आतंकवाद’

इस पूरे मामले ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब आतंकवाद सिर्फ सीमा पार से घुसपैठ तक सीमित नहीं रहा। अब मोबाइल स्क्रीन ही नया बॉर्डर बन चुकी है। इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए युवाओं को मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है। उन्हें अकेलेपन, बेरोजगारी, गरीबी और गुस्से का फायदा उठाकर जाल में फंसाया जा रहा है। सबसे खतरनाक बात यह है कि आतंकी संगठन अब सीधे हमले नहीं कर रहे। वे भारत के अंदर ही “लोकल स्लीपर सेल” तैयार कर रहे हैं। ऐसे लोग, जो सामान्य दिखते हैं। आम जिंदगी जीते हैं। लेकिन जरूरत पड़ने पर हिंसा के लिए एक्टिव हो जाते हैं।

रेलवे स्टेशन, भीड़भाड़ वाली जगहें और पुलिस टारगेट पर

ATS सूत्रों के मुताबिक इस नेटवर्क का फोकस रेलवे स्टेशन, पुलिस चौकियां, भीड़भाड़ वाले इलाके और संवेदनशील सरकारी संस्थान थे। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या आरोपियों ने किसी और जगह की भी रेकी की थी। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि इनके संपर्क में और कितने लोग थे। फिलहाल दोनों आरोपियों से लगातार पूछताछ जारी है। लेकिन इस केस ने एक बात साफ कर दी है। पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क अब बंदूक से ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा है। और यही नया खतरा सबसे ज्यादा खतरनाक है।

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