गोरखपुर में 24 करोड़ का बड़ा फ्रॉड: फर्जी स्क्रीनशॉट से कंपनी को लगाया चूना, 21 लोगों पर FIR

गोरखपुर|08 मई 2026
फर्जी स्क्रीनशॉट से कंपनी को लगाया चूना, 21 लोगों पर FIR

जिले में करोड़ों रुपए की बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। रियल एस्टेट, ज्वेलरी और शेयर मार्केट से जुड़ी एक कंपनी के साथ करीब 24 करोड़ रुपए की ठगी की गई। आरोप है कि दो युवकों ने पहले कंपनी मालिक का भरोसा जीता। फिर धीरे-धीरे बिजनेस से जुड़ गए और फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए करोड़ों रुपए का घोटाला कर डाला। मामले का खुलासा कंपनी के ऑडिट के दौरान हुआ। अब कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने 21 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह पूरा मामला गुलरिहा थाना क्षेत्र का है। रेल विहार फेज-1 करीमनगर निवासी 44 वर्षीय विश्वजीत श्रीवास्तव ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वे रियल एस्टेट, ज्वेलरी और शेयर मार्केट ब्रोकिंग का कारोबार करते हैं। उनकी कई कंपनियां संचालित हैं। इन्हीं कंपनियों के जरिए आरोपियों ने करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा किया। कुछ समय बाद सोनू ने मुझे अपने एक रिश्तेदार शिवम से यह कहकर मिलवाया कि शिवम को कमीशन पर मार्केटिंग का अच्छा अनुभव है और वह दिल्ली में बड़े पैमाने पर काम करता है।

पहले जीता भरोसा, फिर शुरू किया खेल

विश्वजीत श्रीवास्तव के मुताबिक साल 2023 में उनकी पहचान कुशीनगर के कुबेरस्थान निवासी सोनू जायसवाल से हुई। सोनू ने धीरे-धीरे उनका विश्वास जीत लिया और कंपनी में फाउंडर पद पर काम करने लगा। कुछ समय बाद उसने अपने रिश्तेदार शिवम को भी कंपनी से जोड़ दिया। सोनू ने बताया कि शिवम को मार्केटिंग का अच्छा अनुभव है और वह दिल्ली में बड़े स्तर पर काम कर चुका है। इसके बाद विश्वजीत ने शिवम को एजेंट के तौर पर कंपनी में शामिल कर लिया। दोनों आरोपी कंपनी वीएस टीआरवीई ओपीसी टेक्नोलॉजी कंपनी आस्था जेम्स एण्ड ज्वेलर्स और आस्था रिटेलर के साथ अन्य कंपनियों में लोगों का पैसा लगवा कर अपना कमीशन लेते थे।

ऐसे किया करोड़ों का घोटाला

कंपनी में निवेश करने वाले लोगों के भुगतान का स्क्रीनशॉट शिवम, सोनू को भेजता था। फिर सोनू यह स्क्रीनशॉट कंपनी के अकाउंटेंट हरिकेश प्रसाद तक पहुंचाता था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगा। लेकिन बाद में करीब चार करोड़ 50 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन का एक स्क्रीनशॉट देखकर अकाउंटेंट को शक हुआ। इसके बाद कंपनी के खाते और स्क्रीनशॉट का मिलान किया गया। जांच में पता चला कि स्क्रीनशॉट पूरी तरह फर्जी थे। आरोपियों ने बेहद शातिर तरीके से कंपनी को चूना लगाया था। वे लाखों रुपए के फर्जी ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट बनाते थे, जबकि असल में कंपनी के खाते में सिर्फ एक रुपया ट्रांसफर किया जाता था। बाकी रकम रिश्तेदारों और करीबियों के खातों में भेज दी जाती थी। पुलिस के मुताबिक यह खेल पिछले तीन महीनों से लगातार चल रहा था। आरोपियों ने करोड़ों रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर अपने इस्तेमाल में ले लिए।

ऑडिट में खुला पूरा मामला

30 अप्रैल को कंपनी की क्लोजिंग और ऑडिट के दौरान पूरे घोटाले का खुलासा हुआ। विश्वजीत श्रीवास्तव और अकाउंटेंट हरिकेश प्रसाद जब पुराने ट्रांजैक्शन की जांच कर रहे थे, तभी फर्जी भुगतान की परतें खुलनी शुरू हुईं। जांच में पता चला कि करीब 20 लोगों के जरिए कंपनी के नाम पर करोड़ों रुपए के फर्जी स्क्रीनशॉट भेजे गए थे। सभी ट्रांजैक्शन कूटरचित पाए गए। इसके बाद कंपनी प्रबंधन ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

21 लोगों पर केस दर्ज, तलाश जारी

मामले में कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने 21 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। थाना प्रभारी जगदीश प्रसाद पाल ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि घोटाले में और लोगों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है। इस हाई-प्रोफाइल फ्रॉड ने शहर के कारोबारी जगत में भी हलचल मचा दी है।

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