हाईकोर्ट के आदेश पर गोरखपुर में बड़ा एक्शन: 188 पार्क और 10 खेल मैदानों की सूची जारी, खुले मैदानों और हरित क्षेत्रों को बचाने की तैयारी तेज

शहर में पार्कों, खेल मैदानों और खुली जमीनों पर बढ़ते अतिक्रमण के बीच नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के निर्देश के बाद नगर निगम ने शहर के 188 पार्कों, 10 खेल मैदानों और 2 खुली सार्वजनिक जगहों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। इन सभी स्थानों को अब ‘खुली जगह संरक्षण और विनियमन अधिनियम 1975’ के तहत संरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नगर निगम की इस कार्रवाई को शहर के पर्यावरण, बच्चों के खेल और सार्वजनिक सुविधाओं के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
नगर निगम का कहना है कि सूची जारी होने के बाद अब इन जगहों पर अवैध कब्जा, व्यावसायिक निर्माण और जमीन की हेराफेरी पर प्रभावी रोक लग सकेगी। लंबे समय से शहर के कई पार्क और मैदान धीरे-धीरे सिकुड़ते जा रहे थे। कहीं अवैध पार्किंग बन गई थी तो कहीं अस्थायी दुकानें और निर्माण खड़े हो गए थे। अब इन सभी जगहों का रिकॉर्ड तैयार कर उन्हें कानूनी सुरक्षा दी जाएगी। इससे आने वाले समय में शहर के हरित क्षेत्र सुरक्षित रहेंगे और लोगों को खुला वातावरण मिल सकेगा।
तीन महीने तक मांगे गए सुझाव और आपत्तियां
नगर निगम ने जारी सूची पर आम लोगों से सुझाव, दावे और आपत्तियां भी मांगी हैं। नागरिक अगले तीन महीने के भीतर अपने सुझाव दे सकेंगे। इसके बाद अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी और संबंधित स्थानों को आधिकारिक तौर पर पार्क, खेल मैदान और ओपन स्पेस घोषित कर दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता रखी जाएगी ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो। नगर निगम की ओर से जारी सूची में हर पार्क और मैदान का नाम, वार्ड, स्थान और क्षेत्रफल दर्ज किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, सूची तैयार करने में कई विभागों का सहयोग लिया गया। पुराने रिकॉर्ड, राजस्व दस्तावेज और जमीन की स्थिति का भी सत्यापन कराया गया है।
हाईकोर्ट ने जताई थी नाराजगी
यह पूरी कार्रवाई धर्मपाल यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के निर्देश के बाद शुरू हुई। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की पीठ ने टिप्पणी की थी कि 1975 के अधिनियम और 2005 के नियम लागू होने के बावजूद प्रदेश में अब तक पार्कों और खेल मैदानों की समग्र सूची तक तैयार नहीं की गई। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही माना था। कोर्ट ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्रों में मौजूद सभी पार्क, खेल मैदान और सार्वजनिक खुली जमीनों की सूची तैयार करें। अदालत ने कहा कि अगर समय रहते इन जमीनों को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों के पास खुला वातावरण नहीं बचेगा।
पर्यावरणविदों ने बताया ऐतिहासिक फैसला
नगर निगम की इस पहल का पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया है। पर्यावरणविद् डॉ. गोविंद पाण्डेय ने कहा कि शहरों में तेजी से हरित क्षेत्र खत्म हो रहे हैं। ऐसे में यह फैसला बेहद जरूरी था। उन्होंने कहा कि सूची बनने के बाद पार्कों और मैदानों पर कब्जा करना आसान नहीं होगा। इससे बच्चों और युवाओं को खेलने के लिए सुरक्षित स्थान मिलेंगे। हेरिटेज फाउंडेशन की संरक्षिका डॉ. अनिता अग्रवाल ने कहा कि सार्वजनिक जगहें किसी भी शहर की पहचान होती हैं। अगर इन्हें बचाया नहीं गया तो भविष्य में प्रदूषण और भीषण गर्मी जैसी समस्याएं और बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि सूचीबद्ध होने के बाद इन जमीनों का इस्तेमाल सिर्फ सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकेगा।
जीडीए और नगर पंचायतों को भी बनानी होगी सूची
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब गोरखपुर विकास प्राधिकरण और जिले की 11 नगर पंचायतों को भी अपने क्षेत्रों की सूची जारी करनी होगी। इसमें पार्कों, खेल मैदानों और खुली जमीनों का पूरा ब्यौरा देना होगा। अधिकारियों के मुताबिक, हर जगह की वार्डवार जानकारी और क्षेत्रफल दर्ज किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई जमीन गायब न हो सके। अपर नगर आयुक्त अतुल कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। लोगों से सुझाव और आपत्तियां मिलने के बाद अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर निगम सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रहा है।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।










