गोरखपुर में एग्रो इनपुट डीलरों का बंद: 2685 लाइसेंसधारियों ने बंद रखीं दुकानें, नीतियों पर पुनर्विचार की मांग

जिले में सोमवार को कृषि क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों ने एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन के आह्वान पर जिले के कुल 2685 बीज, उर्वरक और कृषि रक्षा रसायन बिक्री लाइसेंसधारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। यह बंद पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत किया गया। शहर से लेकर तहसील और ब्लॉक स्तर तक इसका व्यापक असर देखने को मिला। सुबह से ही बाजारों में सन्नाटा रहा। किसानों को भी खरीदारी में परेशानी का सामना करना पड़ा। व्यापारियों ने इसे अपनी मांगों के समर्थन में मजबूत कदम बताया।
गोरखपुर बीज-उर्वरक व्यापारी संघ के जिला अध्यक्ष श्रद्धानन्द त्रिपाठी ने बताया कि बंद पूरी तरह सफल रहा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ विरोध नहीं बल्कि अपनी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का माध्यम है। जिले में उर्वरक के 1235 थोक और फुटकर लाइसेंसधारी हैं। वहीं करीब 850 बीज विक्रेता हैं। इसके अलावा लगभग 600 कृषि रक्षा रसायन के लाइसेंसधारी भी इस आंदोलन में शामिल रहे। सभी ने एक साथ दुकानें बंद रखकर संगठन की ताकत दिखाई।
राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा बना गोरखपुर
यह बंद सिर्फ गोरखपुर तक सीमित नहीं रहा। यह देशव्यापी अनिश्चितकालीन आंदोलन का हिस्सा है। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहन कलंत्री के आह्वान पर यह कदम उठाया गया। स्थानीय स्तर पर संघ के पदाधिकारियों ने पिछले एक सप्ताह से जनसंपर्क अभियान चलाया था। व्यापारियों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उन्हें बंद में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया। उपाध्यक्ष दिनेश सिंह, नवनीत जायसवाल और अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि इस बार रिकॉर्ड स्तर पर समर्थन मिला।
टैगिंग खत्म हो, मार्जिन बढ़े
व्यापारियों ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि अनुदानित उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग बिक्री तुरंत बंद की जाए। इससे व्यापारियों और किसानों दोनों को नुकसान होता है। इसके अलावा यूरिया और एनपीके की डिलीवरी एफओआर आधार पर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। डीलरों का कहना है कि इससे ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की समस्या कम होगी।
जवाबदेही तय करने की मांग
व्यापारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी उत्पाद का सैंपल फेल होता है तो कार्रवाई डीलर पर नहीं बल्कि निर्माता कंपनी पर होनी चाहिए। उनका तर्क है कि डीलर सिर्फ वितरण का काम करता है। गुणवत्ता की जिम्मेदारी कंपनी की होनी चाहिए। इसके साथ ही ‘साथी पोर्टल’ के जरिए बीज बिक्री को केवल कंपनी और डिस्ट्रीब्यूटर तक सीमित रखने की मांग भी उठाई गई है।
सरकार से संवाद की उम्मीद
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही बातचीत के लिए आगे आएगी। बंद को मिले समर्थन से व्यापारी उत्साहित नजर आए। उनका मानना है कि एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और इसी के दम पर वे अपनी मांगें मनवाने में सफल होंगे।
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