गर्भ संस्कार पर अब वैज्ञानिक रिसर्च करेगा एम्स : गर्भवती महिलाओं पर होगा बड़ा अध्ययन, गोरखपुर एम्स और महायोगी गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय मिलकर करेंगे रिसर्च

एम्स गोरखपुर अब गर्भ संस्कार और प्रीनेटल केयर को लेकर बड़ा रिसर्च करने जा रहा है। यह शोध गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे शिशु पर दोनों प्रक्रियाओं के प्रभाव को समझने के लिए किया जाएगा। इस रिसर्च में यह जानने की कोशिश होगी कि आयुर्वेद आधारित गर्भ संस्कार और आधुनिक प्रीनेटल केयर का गर्भस्थ शिशु और मां के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है।
रिसर्च के तहत गर्भवती महिलाओं को दो अलग-अलग समूहों में बांटा जाएगा। पहले समूह को गर्भ संस्कार प्रक्रिया के तहत रखा जाएगा। वहीं दूसरे समूह का इलाज और देखभाल आधुनिक प्रीनेटल केयर सिस्टम के तहत होगी। दोनों समूहों की महिलाओं के ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और तनाव स्तर की निगरानी की जाएगी। इसके आधार पर शोध टीम निष्कर्ष तैयार करेगी।
गर्भ संस्कार और प्रीनेटल केयर पर होगा तुलनात्मक अध्ययन
डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि आयुर्वेद में गर्भ संस्कार की अवधारणा काफी पुरानी है। एलोपैथी में इसी को प्रीनेटल केयर के रूप में देखा जाता है। इसमें पोषण, नियमित जांच, विटामिन सपोर्ट और तनाव मुक्त जीवनशैली पर जोर दिया जाता है।
क्या गर्भ में बच्चा आवाज और भावनाओं को महसूस करता है?
रिसर्च का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि क्या गर्भ में पल रहा शिशु बाहरी आवाज, संगीत और भावनाओं पर प्रतिक्रिया देता है। इसी आधार पर वैज्ञानिक तरीके से दोनों प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाएगा। एम्स की टीम समय-समय पर कई मेडिकल टेस्ट भी करेगी।
महायोगी गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय भी करेगा सहयोग
इस रिसर्च में महायोगी गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय भी सहयोग करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बन सकता है।
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