चुनाव में गए बंगाली श्रमिक: गोरखपुर में विकास कार्यों की रफ्तार धीमी, 300 श्रमिक छोड़ चुके शहर

गोरखपुर|20 अप्रैल 2026
गोरखपुर में विकास कार्यों की रफ्तार धीमी, 300 श्रमिक छोड़ चुके शहर

गोरखपुर में चल रहे विकास कार्यों की गति इन दिनों धीमी पड़ गई है। इसकी वजह है पश्चिम बंगाल चुनाव। यहां काम कर रहे बड़ी संख्या में बंगाली श्रमिक अपने घर लौट गए हैं। जानकारी के मुताबिक अब तक करीब 300 श्रमिक शहर छोड़ चुके हैं। आने वाले एक-दो दिनों में और श्रमिकों के जाने की संभावना है। इसका सीधा असर शहर के बड़े प्रोजेक्ट्स पर दिखने लगा है। कई निर्माण स्थल पर काम की रफ्तार कम हो गई है। अधिकारी अब तय समय पर काम पूरा कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था में जुट गए हैं।

पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित होंगे। ऐसे में श्रमिक अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए घर लौट रहे हैं। कई श्रमिक अपने परिवार के साथ रवाना हुए हैं। इसे लेकर निर्माण कंपनियों और ठेकेदारों को पहले से जानकारी थी, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में श्रमिकों के एक साथ जाने से काम प्रभावित हो गया है।

प्रोजेक्ट्स पर दिखा असर

शहर के कई बड़े प्रोजेक्ट्स इस समय निर्माणाधीन हैं। ट्रांसपोर्टनगर-पैडलेगंज सिक्सलेन फ्लाईओवर में पहले करीब 150 बंगाली श्रमिक काम कर रहे थे। अब वहां सिर्फ 25 से 30 श्रमिक ही बचे हैं। इसी तरह डोमिनगढ़ ओवरब्रिज से 15 श्रमिक चले गए हैं। हड़हवा फाटक ओवरब्रिज साइट पर 30 श्रमिक कम हो गए हैं। कलेक्ट्रेट भवन निर्माण में भी 60 श्रमिकों के जाने से काम प्रभावित हुआ है। ताल नदोर स्थित वेटरनरी कॉलेज प्रोजेक्ट से 35 श्रमिक जा चुके हैं। करीब 25 और श्रमिकों के जाने की तैयारी है।

पुल और ऊंची इमारतों में माहिर होते हैं बंगाली श्रमिक

इंजीनियरों के अनुसार बंगाली श्रमिक तकनीकी कामों में ज्यादा दक्ष माने जाते हैं। खासकर पुल और ऊंची इमारतों के निर्माण में उनकी भूमिका अहम होती है। यही वजह है कि ठेकेदार ऐसे कामों के लिए बंगाली श्रमिकों को प्राथमिकता देते हैं। वे जोखिम वाले काम भी आसानी से संभाल लेते हैं।

वैकल्पिक श्रमिकों की तलाश शुरू

काम की रफ्तार बनाए रखने के लिए अधिकारियों ने ठेकेदारों को निर्देश दिए हैं। उन्हें कहा गया है कि बिहार और दूसरे जिलों से श्रमिक बुलाए जाएं। फिलहाल कई प्रोजेक्ट्स में पीलीभीत से आए श्रमिक काम संभाल रहे हैं। राजघाट क्षेत्र में दो पुलों के निर्माण में करीब 70 श्रमिक पीलीभीत से हैं। कुछ श्रमिक ऐसे भी हैं जिनके परिवार उत्तर प्रदेश में बस गए हैं। इसलिए वे चुनाव में नहीं गए और काम जारी रखे हुए हैं।

30% से ज्यादा श्रमिक हुए कम

श्रमिक ठेकेदारों के अनुसार शहर में करीब 30 प्रतिशत से ज्यादा श्रमिक काम छोड़कर चले गए हैं। यह संख्या आगे और बढ़ सकती है। ठेकेदार का कहना है कि कुल मिलाकर 300 से ज्यादा श्रमिक शहर से जा चुके हैं। इससे निर्माण कार्यों की टाइमलाइन पर असर पड़ना तय है।

अधिकारियों का दावा, नहीं रुकेगा काम

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता मनीष कुमार सिंह ने बताया कि श्रमिकों को चुनाव के लिए छुट्टी दी गई है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि मतदान के बाद तुरंत वापस लौटें। उन्होंने कहा कि 25-30 प्रतिशत श्रमिक ही गए हैं। ठेकेदारों को वैकल्पिक श्रमिक बुलाने के लिए कहा गया है। काम पूरी तरह बंद नहीं होगा। हालांकि गति जरूर प्रभावित हुई है।

नव्य जागरण

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