‘भाड़े वाले नहीं, अखाड़े वाले हैं निषाद’: मंच पर फूट-फूटकर रोए डॉ. संजय निषाद, बोले सपा-बसपा ने हमारे बच्चों को बेरोजगार किया

गोरखपुर में रविवार को निषाद पार्टी ने हजारों कार्यकर्ताओं की रैली निकालकर शक्ति प्रदर्शन किया। 3000 बाइकों पर सवार कार्यकर्ता 10 किलोमीटर से अधिक का फासला तय कर महंत दिग्विजयनाथ पार्क पहुंचे। यहां निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद का कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। पार्किंग से लेकर मंच तक पहुंचने के बीच कई बार फूलों की बारिश की गई। पंचायत चुनावों से पहले हुई राजनीतिक रैली के जरिए निषाद पार्टी ने अपनी ताकत का एहसास कराया। महंत दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित सभा में डॉ. संजय निषाद मंच से फूट-फूट कर रोए। उन्होंने कहा कि हमारे लोगों का वोट छीना जा रहा है। हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है। हमें हमारा हक नहीं मिल रहा। लेकिन अब हम मजबूत बनेंगे। 'निषाद भाड़े वाले नहीं, अखाड़े वाले हैं।' उन्होंने निषाद समाज से एकजुट होकर पार्टी को मजबूत बनाने की बात कही। इससे पहले रैली का नेतृत्व कर रहे डॉ. संजय निषाद ने खुद बुलेट चलाई। पैडलेगंज चौराहे पर जब भीड़ बेकाबू होने लगी तो वे मर्सिडीज में सवार होकर सभा स्थल तक पहुंचे। मत्स्य मंत्री ने कहा कि निषाद समाज का हक दिलाने के लिए प्रदेश में चार बड़ी रैलियां की जाएंगी। इससे पहले सिटी के प्रतिष्ठित व्यापारी एवं समाजसेवी आलोक कुमार अग्रवाल ने निषाद पार्टी की सदस्यता ली। डॉ. संजय निषाद ने उन्हें अपने हाथों से पार्टी का गमछा पहनाकर स्वागत किया। वे पूरी रैली व मंच पर डॉ. संजय निषाद के साथ नजर आए।


सपा-बसपा ने छीनी हमारे लड़कों की पढ़ाई
महंत दिग्विजयनाथ पार्क में सभा को संबोधित करते हुए डॉ. संजय निषाद ने विपक्षियों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा-बसपा ने हमारे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई छीनी। दोनों दलों ने निषाद बच्चों को रोजी-रोटी से दूर रखा। अब भाजपा सरकार में हमें हमारा हक मिल रहा है। उन्होंने सीएम योगी व पीएम मोदी से मझवार जाति के तर्ज पर केवट, बिंद, मल्लाह और निषाद को SC/ST का आरक्षण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि अभी यह आरक्षण 27 प्रतिशत है। सरकार निषाद समाज को 9 प्रतिशत आरक्षण देकर इसे 32 प्रतिशत बनाए। उन्होंने मंच से सीएम योगी की तारीफ करते हुए कहा कि जब भी निषाद आरक्षण की मांग की जाती है तो सीएम सदैव हमारे साथ खड़े होते हैं। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) का बीजेपी से गठबंधन है।

सवर्णों ने नहीं छीना हमारा हक
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि सवर्णों ने कभी भी हमारा हक नहीं छीना। सपा-बसपा की सरकारों ने सदैव हमें दबाने का काम किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार में हमें हमारा अधिकार मिल रहा है। डॉ. संजय निषाद ने कहा कि निषाद समाज के बच्चे सरकारी पैसे से पढ़कर नौकरी पाएंगे। उन्होंने हर जिले में कोचिंग स्थापित करने की मांग की।
अपना किस्सा चाहिए या हिस्सा
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि सभी विभागों में साइकिल व हाथी वाले भरे पड़े हैं। लेकिन अब निषाद के बच्चों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं में गर्म जोश भरते हुए कहा कि आपको अपना किस्सा चाहिए या हिस्सा? बीजेपी को हमारे बच्चों को सांसद-विधायक बनाना होगा। मत्स्य मंत्री ने कहा कि जो हमारे आरक्षण की मांग करेगा हम उसी को अपने गांव में इंट्री देंगे। बाकी लोगों को इंट्री नहीं मिलेगी। यूपी में निषाद समाज का वोट शेयर करीब 4.5 प्रतिशत है। 80 विधानसभा में एक लाख से ज्यादा संख्या में निषाद वोटर निर्णायक भूमिका अदा करते हैं।
विधायकों को मंच से दी चेतावनी
डॉ. संजय निषाद ने मंच से चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ विधायक-सांसद गलत काम कर रहे हैं। वे निषाद बच्चों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करवा रहे हैं। ऐसे विधायकों को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि सुधर जाओ वर्ना हम चुनाव नहीं जीतने देंगे। कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा कि संविधान, वोट, झंडा और नेता में पॉवर होता है। आप अपनी पार्टी को मजबूत करिए। आपको आपका हक मिलने से कोई नहीं रोक पाएगा। शैतानों ने आपके बच्चों को बेरोजगार बनाया है। इनके खिलाफ आप एकजुट हो जाएं।

व्यापार बढ़ेगा तो युवा बेरोजगार नहीं रहेगा
निषाद पार्टी ज्वाइन करने के बाद शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी एंव समाजसेवी आलोक कुमार अग्रवाल ने कहा कि डॉ. संजय निषाद की उनके समाज के प्रति निष्ठा, प्रतिबद्धता व ईमानदारी से प्रभावित होकर उन्होंने निषाद पार्टी ज्वाइन की है। उन्होंने कहा कि व्यापारी समाज में सभी जाति-धर्म के लोग शामिल हैं। आज जब हमारे किसान भाई, मध्यम वर्ग के व्यापारी, स्टार्टअप शुरु करने वाला युवा परेशान होता है तो, मन से एक ही आवाज आती है कि आखिर कब तक? वे खुद को कभी कर्ज के दबाव में, कभी बिजनेस डूबने के भय से और कभी प्रतिफल न मिलने के डर से असहाय महसूस करते हैं। लाख कोशिशों के बाद भी उनकी प्रतिभा क्षीण हो जाती है। लेकिन मैं आज यह वचन देता हूं कि इस जीवन के अंतिम क्षण तक हर उस मंच पर अपने भाईयों-बहनों और माताओं की आवाज उठाता रहूंगा, जहां से उन्हें सम्मान मिलेगा। उन्हें व्यापार सुरक्षा का कानूनी हक दिलाकर ही मैं चैन की सांस लूंगा। आलोक ने कहा कि आज से निषाद पार्टी का हरएक कार्यकर्ता मेरा भाई है। सर्वसमाज में जो मुझे सहयोग के लायक समझेगा उसके लिए मैं दिन-रात का फासला मिटाकर पूरी तत्परता के साथ खड़ा रहूंगा। उन्होंने कहा कि व्यापार बढ़ेगा तो युवा बेरोजगार नहीं रहेगा। हमें व्यापार व उद्योगों का विकास करने की आवश्यक्ता है। इससे हमारा देश व भविष्य दोनों मजबूत होंगे।
80 सीटों पर निषाद वोटर्स का प्रभाव
• उत्तर प्रदेश में निषाद समाज का वोट लगभग 4.5 प्रतिशत है। 80 ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां उनकी संख्या एक लाख के करीब है।
• प्रदेश की लगभग 160 सीटों पर वे प्रभावी भूमिका में हैं। निषाद समाज की सभी उपजातियों का जोड़ दें तो उनकी संख्या लगभग 9 प्रतिशत हो जाएगी।
• गोरखपुर, वाराणसी, आजमढ़, बलिया, मऊ, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर, प्रयागराज, सुल्तानपुर, फतेहपुर आदि जिलों में निषाद बड़ी संख्या में हैं।
• 2022 विधानसभा चुनावों पर गौर करें तो एनडीए में निषाद पार्टी को 15 सीटें मिली थीं। इनमें से 9 पर जीत मिली थी। 6 विधायक निषाद पार्टी के सिंबल पर लड़े थे, बाकी भाजपा।
निषाद पार्टी की स्थापना के 10 साल पूरे हुए
डॉ. संजय निषाद ने कहा गोरखपुर में हमारी जड़ें हैं। 2007 में यहां रामगढ़ताल का पानी और प्रयागराज में निषादराज के किले की मिट्टी लेकर मैंने यात्रा शुरू की थी। उस यात्रा को 19 साल पूरे हो गए हैं और निषाद पार्टी को 10 साल। वह मिट्टी व पानी प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों के साथ 20 राज्यों तक पहुंच चुकी है। सबसे पहली जीत भी यहीं मिली थी। प्रवीण निषाद ने 2018 लोकसभा उपचुनाव जीता था। गोरखपुर में भाजपा के लिए यह बड़ी चुनौती थी।
निषाद पार्टी की चार बड़ी मांगें...
1. निषाद समाज को OBC की बजाए SC में शामिल करें : पार्टी के गठन का आधार ही यही था। सपा के साथ गठबंधन के समय भी निषाद पार्टी इसी मांग के साथ जुड़ी थी। फिर भाजपा के साथ गठबंधन भी इसी शर्त पर हुआ था। बीच में निषाद पार्टी ने गठबंधन में रहते हुए नारा दिया था कि 'आरक्षण नहीं, तो वोट नहीं' और 'मझवार आरक्षण लागू करो'। OBC से 9 प्रतिशत आरक्षण कम करके इसे SC में जोड़ा जाए।
2. ताल, बालू के ठेके का मिले पहला हक: निषाद पार्टी के मुताबिक उनके पूर्वजों ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी थी। इसके चलते उनकी पुश्तैनी जमीनें छीन ली गई थीं। हमारा समाज नदी के किनारे रहता है। ऐसे में पहली प्राथमिकता पर बालू के ठेके भी मिलने चाहिए, सरकार चाहे तो रॉयल्टी ले ले।
3. जमीन का हक मिले: संजय निषाद कहते हैं कि पहले गांव के ताल-घाट वर्ग-3 में दर्ज होते थे। इस पर मालिकाना हक निषाद समाज के लोगों का होता था। लेकिन 2007 में जब यूपी में बसपा सरकार बनी, तो ये मालिकाना हक छीन लिया गया। हमने कोर्ट से इस नियम को निरस्त कराया। मायावती के शासन में स्टे भी लिया था, जिसे हमने खारिज करा दिया है।
4. विमुक्ति जनजाति की सुविधाएं मिलें: केवट-मल्लाह आदि जातियों को भारत सरकार ने विमुक्ति जनजाति घोषित कर रखा है। इन्हें 74 प्रकार की सुविधाएं देकर समाज के मुख्यधारा से जोड़ना था। लेकिन 2013 में सपा सरकार ने ये अधिकार भी छीन लिया।
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