नीली हल्दी है औषधीय गुणों से भरपूर: गले व सांस की बीमारी में मिलता है आराम, धार्मिक कार्यों के लिए भी बढ़ रही मांग

निवेदिता चंद|28 मार्च 2026
गले व सांस की बीमारी में मिलता है आराम, धार्मिक कार्यों के लिए भी बढ़ रही मांग

हल्दी का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक खास रंग की छवि बन जाती है, जिसे हम अपनी सांस्कृतिक परंपरा से जोड़कर देखते हैं। प्राय: हम अपने मांगलिक कार्यक्रमों में शुभ-शगुन के रुप में पीले रंग के तौर पर करते हैं। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हल्दी केवल पीले रंग की न होकर नीली भी होती है, जिसे स्थानीय भाषा में काली हल्दी भी कहा जाता है। जहां एक ओर पीली हल्दी का इस्तेमाल खाने के साथ-साथ सौन्दर्य और दवाओं में किया जाता है तो वहीं दूसरी ओर अपनी औषधीय गुणों से भरपूर नीली हल्दी को लेकर सेहत दुरुस्त करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

जिला अस्पताल के डॉ. राजेश कुमार के मुताबिक नीली हल्दी अपनी उच्च एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण मुख्य रूप से आयुर्वेद में औषधीय रूप से उपयोग की जाती है। यह गले की खराश, सांस की समस्याओं, जोड़ों के दर्द, पाचन संबंधी समस्याओं, मधुमेह और त्वचा की एलर्जी का इलाज करने के लिए विकारों और त्वचा की एलर्जी के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती है। इसके प्रयोग से होने वाले लाभ को देखते हुए अब लोग तेजी से इसके सेवन के लिए आकर्षित हो रहे हैं। लोगों की मांग के मद्देनजर शहर के सब्जी व्यवसायी भी अब अपने स्टॉक में पर्याप्त नीली हल्दी रखने लगे हैं।

देश में यहां होती है नीली हल्दी की खेती

नीली हल्दी का ऊपर से हल्की भूरी नजर आती है। खाने में इसका स्वाद कड़वा होता है। वहीं, इसकी सुगंध कपूर के जैसी होती है। नीली हल्दी की खेती मध्य प्रदेष, उड़ीसा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के राज्यों में अधिक होती है। यह एक तरह का औषधीय पौधा होता है जो आम तौर पर जंगलों में अधिक उगता है। इसकी खेती करने वाले किसानों के मुताबिक इसकी पैदावार पीली हल्दी की अपेक्षा कम होती है, जिससे इसकी कीमत आम तौर पर अधिक होती है।

धार्मिक कार्यों में भी बढ़ रही मांग

आम तौर पर हम आज तक सभी शुभ कार्यों में पीली हल्दी का ही सेवन करते रहे हैं, लेकिन अब पूजा-पाठ व अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नीली हल्दी का प्रयोग तेजी से हो रहा है। औषधीय व धार्मिक मांग को देखते हुए कुछ सप्लायर इसे ऑनलाइन स्टोर पर भी बेंच रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो वैज्ञानिक ढंग से इसकी खेती करके अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।