गोरखपुर में पासपोर्ट रिपोर्ट के नाम पर रिश्वत: थाना कार्यालय में पैसे लेते दिखा होमगार्ड, वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप

जिले के पीपीगंज थाने से रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। थाने में तैनात एक होमगार्ड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में वह कथित तौर पर पैसे लेते दिखाई दिया। दावा किया गया कि पासपोर्ट रिपोर्ट लगाने के बदले रिश्वत ली जा रही थी। वीडियो वायरल होते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। सीनियर अधिकारियों ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया। जांच के आदेश जारी किए गए। शुरुआती जांच के बाद आरोपी होमगार्ड को थाने से हटा दिया गया। वहीं संबंधित मुंशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। अब पूरे मामले की गहराई से जांच कराई जा रही है। पुलिस अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाल रही है।
वायरल वीडियो में होमगार्ड थाना कार्यालय के अंदर बैठा दिखाई देता है। उसके सामने कुछ लोग मौजूद हैं। इसी दौरान वह कथित तौर पर पैसे लेते नजर आता है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। लोगों ने इसे लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। आरोप लगाया गया कि पासपोर्ट सत्यापन के नाम पर धन वसूली होती थी। इसके अलावा चरित्र प्रमाणपत्र और अन्य रिपोर्टों में भी पैसे लिए जाते थे। मामला सामने आने के बाद पुलिस अफसरों की चिंता बढ़ गई। वीडियो की सत्यता जांचने के लिए अधिकारियों ने टीम गठित की। जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। इसके बाद विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई।
मुंशी पर होमगार्ड से वसूली कराने का आरोप
मामले में थाने के मुंशी सूर्यकांत भारती का नाम सामने आया। आरोप है कि कुछ होमगार्डों को विशेष कामों में लगाया गया था। इनमें पासपोर्ट रिपोर्ट और चरित्र सत्यापन शामिल थे। आरोप है कि इन कामों के जरिए पैसे वसूले जाते थे। पुलिसकर्मी सीधे पैसे लेने से बचते थे। इसके लिए छोटे कर्मचारियों और बिचौलियों का इस्तेमाल किया जाता था। बताया गया कि वसूली गई रकम कई स्तरों पर बांटी जाती थी। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन वायरल वीडियो के बाद मामला गंभीर हो गया। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इस प्रक्रिया में और कौन-कौन शामिल था।
जांच रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई
एसपी नार्थ ज्ञानेंद्र ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने जांच की जिम्मेदारी अधिकारियों को सौंपी। जांच अधिकारी अनुराग सिंह ने पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई की गई। आरोपी होमगार्ड सुनील कुमार को थाने से हटा दिया गया। साथ ही विभागीय कार्रवाई के लिए कमांडेंट को पत्र भेजा गया। दूसरी तरफ मुंशी सूर्यकांत भारती को निलंबित कर दिया गया। अधिकारियों ने साफ कहा कि भ्रष्टाचार किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं होगा। विभाग की छवि खराब करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब वीडियो से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
पूरे मामले पर उठने लगे कई सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि थाने में खुलेआम पैसे कैसे लिए जा रहे थे। स्थानीय स्तर पर भी इस घटना की चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि सत्यापन प्रक्रिया में पहले भी पैसे मांगे जाते थे। हालांकि पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि कोई भी शिकायत सीधे अधिकारियों तक पहुंचाएं। पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होगी। अगर किसी और कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। फिलहाल विभाग इस मामले को लेकर बेहद सतर्क नजर आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए निगरानी और सख्त की जाएगी।
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