विकास की सड़क से पहले धूल छीन लेगी सांसः: गोरखपुर में निर्माण कार्यों में उड़ रही नियमों की धज्जियां, ग्रीन कवर-वाटर स्प्रे खोजे नहीं दिखते

गोरखपुर का विकास तेजी से हो रहा है। आने वाले समय में शहर में कई फोरलेन, सिक्सलेन सड़कें और फ्लाईओवर मूर्त रुप लेंगे। निश्चित तौर पर मेट्रो सिटीज से प्रतिस्पर्धा करने के लिए ये काम बेहद जरुरी हैं। लेकिन इसके दूसरों पहलुओं पर भी ध्यान देने की आवश्यक्ता है। शहर में चल रहे किसी भी निर्माण कार्य में स्वास्थ्य सुरक्षा के तय नियमों का पालन नहीं हो रहा है। विभिन्न प्रोजेक्टस के निर्माण में एनजीटी के नियमों की अनदेखी कर लोगों की सेहत बिगाड़ी जा रही है। हाल ये है कि शहर की किसी भी सड़क पर यात्रा करने के बाद बिना नहाए लोगों को नींद नहीं आ रही। वहीं, सड़क किनारे दुकान लगाने वाले व्यापारियों का धंधा दिन ब दिन चौपट होता जा रहा है।
शहर में इन दिनों यहां हो रहे निर्माण कार्य
इन दिनों शहर में ट्रांसपोर्ट नगर से गोपलापुर सिक्सलेन फ्लाईओवर, खोराबार मेडिसिटी, नकहा ओवरब्रिज, पादरी बाजार फ्लाईओवर, मोहद्दीपुर-असुरन फोरलेन व विभिन्न जगहों पर सड़क, आवास व व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य चल रहा है। अक्सर यह देखने में आता है कि निर्माण के लिए ले जाई जा रही मिट्टी, गिट्टी, राख, बालू, सिमेंट व सरिया के टुकड़े सड़क के किनारे व बीच में गिर जाते हैं। जब यहां से अन्य गाड़ियां गुजरती हैं तो धूल का गुबार उठ जाता है। वहीं, निर्माण के दौरान सबसे ज्यादा धूल उड़ती है। हालात यह हैं कि रोजाना इन रास्तों से गुजरने वाले लोगों को सांस की समस्याएं शुरु होने लगी हैं। कई लोग परेशानी के चलते अन्य रास्तों का विकल्प चुन रहे हैं। तारामंडल हनुमान मंदिर के पुजारी अविनाश पांडेय ने निर्माण की धीमी गति पर दुख जताते हुए कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो जल्द ही हमें सांस की कोई गंभीर बीमारी हो जाएगी। बगल में दुकान लगाने वाले नरेंद्र मिश्र ने बताया कि निर्माण कार्य में किसी भी तरह के सुरक्षा इंतजाम नहीं हो रहे हैं, यह हादसों के मुंह में धकेलने जैसा है। शो-रुम के ऑनर अरविंद ने बताया कि फ्लाईओवर की धूल के चलते हमें अपनी दुकान शिफ्ट करनी पड़ी।
बंद हो गया कॉम्प्लेक्स
देवरिया बाईपास मोड़ पर एक बड़ा कॉम्प्लेक्स हुआ करता था, जिसमें कपड़े का शो-रुम, सुपर मार्केट, रेस्टोरेंट व मिठाई की दुकानें हुआ करती थीं। लेकिन सिक्सलेन फ्लाईओवर का निर्माण कार्य शुरु होने के बाद यहां ग्राहकों का आना कम हो गया। धूल का प्रकोप कुछ ऐसा फैला कि पूरा धंधा ही चौपट हो गया। अब हालात ये हैं कि काम्प्लेक्स से करीब 10 दुकानदारों ने अपनी दुकानें आस-पास के मार्केट में शिफ्ट कर दीं। एक मिठाई के कारोबारी की दुकान धूल के चलते पूरी तरह से बंद हो गई।
अस्पताल और कॉलोनियों पर भी संकट
टीपीनगर से गोपलापुर तक बन रहे फ्लाईओवर से सबसे ज्यादा धूल उड़ती है। इस सड़क पर 10 से अधिक बड़े अस्पताल व कई रिहायशी काॅलोनियां बसी हैं। लेकिन बीते सालों में शुरु हुए निर्माण कार्यों ने यहां रहने वाले लोगों को कमरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया है। हालात ये हैं कि लोग घर की बालकनी व अस्पताल के खुले स्पेस में खड़े रहने से डर रहे हैं। वहीं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह धूल और ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। अस्पताल में अगर गलती से कोई खिड़की खुली रह जाए तो मरीजों पर इंफेक्शन का खतरा बन जा रहा है।
जानिए क्या कहता है एनजीटी का नियम
एनजीटी (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) ने देशभर में खुले निर्माण पर रोक लगाई है। एनजीटी ने सभी निर्माण स्थलों को ग्रीन कवर किए जाने और धूल कड़ों से बचने के लिए वाटर स्प्रे की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है। गोरखपुर में लगभग सभी निर्माण कार्यों में इस नियम को ठेंगा दिखाया जा रहा है। ग्रीन कवर व वाटर स्प्रे खोजने पर भी कहीं नजर नहीं आते हैं। एनजीटी में बने प्राविधान के मुताबिक नियम का पालन न करने वाली संस्था पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन जुर्माना न लगने से गोरखपुर में निर्माण करा रही संस्थाएं पूरी तरह से शिथिल बनी हुई हैं।
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