गोरखपुर में फर्जी एटीएस अधिकारी ने बनाया शिकार: आंतकवादी कनेक्शन का दिया झांसा, बुजुर्ग से की लाखों की ठगी

गोरखपुर|21 अप्रैल 2026
आंतकवादी कनेक्शन का दिया झांसा, बुजुर्ग से की लाखों की ठगी

गोरखपुर में साइबर फ्रॉड का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां जालसाजों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर एक रिटायर्ड बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट में ले लिया। वीडियो कॉल पर डराया गया। मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप लगाया गया। जांच के नाम पर 5.50 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। मामला राजघाट थाना क्षेत्र का है। पीड़ित ने अब पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

राजघाट थाना क्षेत्र के हांसुपुर निवासी रुपेश कुमार श्रीवास्तव एक सरकारी विभाग से रिटायर हैं। 15 अप्रैल की सुबह उनके व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली एटीएस से जुड़ा अधिकारी बताया। उसने बात शुरू होते ही गंभीर आरोप लगाया। कहा कि उनके बैंक खाते में एक आतंकवादी ने पैसे भेजे हैं। यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है। जांच जरूरी है। कॉलर ने कहा कि अगर सहयोग नहीं किया तो कानूनी कार्रवाई होगी। यह सुनकर बुजुर्ग घबरा गए। कॉलर ने उन्हें वीडियो कॉल पर ही बने रहने को कहा। साथ ही आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासबुक दिखाने को कहा। डर के माहौल में रुपेश ने सभी डॉक्यूमेंट दिखा दिए।

डराकर कराया आरटीजीएस ट्रांसफर

कॉलर ने पासबुक देखकर कहा कि खाते में मौजूद रकम संदिग्ध है। उसने 5.50 लाख रुपये एक “जांच खाते” में ट्रांसफर करने को कहा। दावा किया कि जांच पूरी होने के बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे। यह सुनकर रुपेश पूरी तरह डर गए। उसी दिन सुबह करीब 11 बजे वह हिंदी बाजार स्थित एसबीआई शाखा पहुंचे। वहां जाकर उन्होंने 5.50 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। ट्रांसफर के बाद भी जालसाज ने संपर्क नहीं छोड़ा। लगातार दबाव बनाता रहा।

हर दो घंटे में वीडियो कॉल, मानसिक दबाव

जालसाज ने रुपेश को हर दो घंटे पर रिपोर्ट करने को कहा। दिन-रात वीडियो कॉल आती रही। रात में कई बार कॉल किया गया। बुजुर्ग पूरी तरह मानसिक दबाव में आ गए। वह पूरी रात सो नहीं पाए। लगातार डर बना रहा कि कहीं उनके खिलाफ केस न दर्ज हो जाए। अगले दिन भी कॉल का सिलसिला जारी रहा। परेशान होकर रुपेश ने अपने बच्चों को पूरी बात बताई। परिवार ने तुरंत मामले को समझा। उन्हें बताया गया कि यह साइबर फ्रॉड है। इसके बाद शाम करीब आठ बजे साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई।

“बुढ़ापे का सहारा छीन लिया”

रुपेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि वह रिटायर्ड कर्मचारी हैं। यह रकम उनकी जिंदगी की जमा पूंजी थी। उन्होंने कहा कि जालसाज ने डराकर उनके बुढ़ापे का सहारा छीन लिया। अभी भी आरोपी वीडियो कॉल कर रहा है। हर दो घंटे में रिपोर्ट मांग रहा है। इस घटना के बाद वह काफी डरे हुए हैं।

पुलिस ने शुरू की जांच

मामले में राजघाट थाने में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। थाना प्रभारी पंकज गुप्ता ने बताया कि शिकायत मिलते ही मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच उप निरीक्षक राजेंद्र सिंह को सौंपी गई है। साइबर टीम भी मामले की जांच में जुटी है। ट्रांजैक्शन डिटेल और कॉल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

कैसे बचें ऐसे डिजिटल फ्रॉड से

साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर इस तरह जांच नहीं करती। न ही पैसे ट्रांसफर करने को कहती है। ऐसे कॉल आने पर तुरंत सतर्क हो जाएं। किसी अनजान व्यक्ति को बैंक डिटेल या डॉक्यूमेंट न दिखाएं। डराने या धमकाने वाली बातों में न आएं। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।

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