फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड से लाखों का खेल: गैंगस्टर एक्ट में दो आरोपी गिरफ्तार, एजेंटों से जुटाते थे बीमाधारकों का रिकॉर्ड

गोरखपुर|1 घंटा पहले
गैंगस्टर एक्ट में दो आरोपी गिरफ्तार, एजेंटों से जुटाते थे बीमाधारकों का रिकॉर्ड

हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को फर्जी मेडिकल दस्तावेजों के जरिए चूना लगाने वाले संगठित गिरोह पर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। गैंगेस्टर एक्ट के तहत वांटेड दो आरोपियों को रामगढ़ताल पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह बीमाधारकों की जानकारी जुटाकर उनके नाम पर फर्जी भर्ती, मेडिकल रिपोर्ट और डिस्चार्ज दस्तावेज तैयार करता था। इन्हीं के आधार पर लाखों रुपये का बीमा क्लेम हासिल करता था। मामले में पहले भी कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पुलिस के अनुसार गिरोह का संचालन विकास मणि त्रिपाठी उर्फ प्रवीण त्रिपाठी करता था। उसके साथ शमशुल कमर उर्फ सोनू खान, अफजल अंसारी, ताहिर खान, राकेश कुमार ओझा, ऋषभ सिंह, इन्द्रेश यादव, अभिषेक शर्मा उर्फ हनी शर्मा और अमन यादव उर्फ गौरव यादव सहित कई लोग जुड़े थे। जांच में पता चला कि गिरोह हेल्थ इंश्योरेंस एजेंटों के माध्यम से बीमा कराने वाले लोगों की पूरी जानकारी हासिल करता था। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराए बिना ही इलाज के नाम पर फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड, बिल और डिस्चार्ज सारांश तैयार कर बीमा कंपनियों से क्लेम पास कराया जाता था। पुलिस के मुताबिक पूरे नेटवर्क का संचालन गोरखपुर और बस्ती स्थित डिसेंट हॉस्पिटल के माध्यम से किया जा रहा था।

इंश्योरेंस कंपनी की शिकायत से खुला पूरा नेटवर्क

मामले का खुलासा तब हुआ, जब बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के ब्रांच ऑपरेटर एवं सर्विस मैनेजर अनूप अग्रवाल ने रामगढ़ताल थाने में शिकायत दर्ज कराई। कंपनी की आंतरिक जांच में सामने आया कि सत्यवीर नामक बीमाधारक के नाम पर एपेक्स हॉस्पिटल और डिसेंट हॉस्पिटल से इलाज का क्लेम लिया गया। वहीं, सत्यवीर ने लिखित रूप से स्पष्ट किया कि वह कभी इन अस्पतालों में भर्ती ही नहीं हुए। जांच में यह भी पता चला कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना फर्जी बैंक खाता खोलकर करीब 1.80 लाख रुपये का बीमा क्लेम प्राप्त किया गया था। इसके बाद वर्ष 2025 में धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया।

फरार आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

विवेचना के दौरान एक अन्य शिकायत में डॉ. अजय कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि उनके नाम और हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर कई बीमा कंपनियों में फर्जी मेडिकल फाइलें तैयार की गईं। मरीजों को अस्पताल में भर्ती दिखाकर लाखों रुपये के क्लेम लिए गए। वहीं, उन्होंने ऐसे किसी मरीज का इलाज नहीं किया था। इस मामले में भी अलग एफआईआर दर्ज की गई। जांच के दौरान वर्ष 2025 और 2026 में गिरोह के कई सदस्यों की गिरफ्तारी कर उनके खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया गया। इसके बाद गैंग चार्ट तैयार कर जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति प्राप्त की गई। पूरे गिरोह के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ। इसी मामले में वांटेड राकेश कुमार ओझा और अभिषेक शर्मा उर्फ हनी शर्मा को अरेस्ट कर कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।

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