पहली बार रंगीन प्रकाशित होगा श्रीमद्भागवत पुराण: नई पीढ़ी को धर्म से जोड़ने की पहल, चित्रों के माध्यम से जीवंत होंगे धार्मिक प्रसंग

धार्मिक साहित्य के क्षेत्र में विश्वभर में पहचान रखने वाले गीता प्रेस ने पहली बार श्रीमद्भागवत महापुराण का रंगीन और चित्रमय संस्करण प्रकाशित किया है। श्रद्धालुओं की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए इस विशेष संस्करण की प्रथम और द्वितीय खंड की तीन-तीन हजार प्रतियां प्रकाशित की गई हैं। आर्ट पेपर पर मुद्रित यह ग्रंथ जल्द ही गीता प्रेस के बुक स्टॉलों और देशभर की प्रमुख शाखाओं पर उपलब्ध कराया जाएगा।
अब तक श्रीमद्भागवत महापुराण केवल पारंपरिक श्वेत-श्याम स्वरूप में उपलब्ध था। लेकिन नए संस्करण में प्रमुख धार्मिक प्रसंगों को आकर्षक रंगीन चित्रों के साथ प्रस्तुत किया गया है। इसमें श्रीकृष्ण लीला, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव, गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, गोवर्धन धारण और रासलीला सहित अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं को चित्रात्मक रूप दिया गया है। प्रत्येक प्रसंग के साथ संबंधित चित्र होने से श्लोकों का अध्ययन अधिक सहज, प्रभावशाली और रोचक बन सकेगा। गीता प्रेस का मानना है कि इससे नई पीढ़ी और युवा वर्ग भारतीय संस्कृति तथा सनातन ग्रंथों से अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ पाएंगे। साथ ही यह संस्करण अध्ययन के अलावा संग्रहणीय महत्व भी रखेगा।
जल्द स्टॉलों पर होगी उपलब्ध
गीता प्रेस ने दोनों खंडों की तीन-तीन हजार प्रतियां प्रकाशित की हैं। प्रथम खंड में 1,216 और द्वितीय खंड में 1,268 पृष्ठ हैं। प्रत्येक खंड की कीमत 1,100 रुपये निर्धारित की गई है। वहीं, साधारण संस्करण का मूल्य 450-450 रुपये है। गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि पहली बार श्रीमद्भागवत पुराण को आर्ट पेपर पर रंगीन एवं चित्रमय स्वरूप में प्रकाशित किया गया है। यह संस्करण शीघ्र ही गीता प्रेस के बुक स्टॉलों पर उपलब्ध होगा। इसके अलावा नेपाल, वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज, हरिद्वार सहित देशभर की प्रमुख शाखाओं में भी इसकी आपूर्ति की जाएगी। श्रद्धालु इसे आसानी से प्राप्त कर सकें।











