गोरखपुर में अमृत 2.0 के तहत बड़ी पहल: 44 हजार घरों को सेप्टिक टैंक से मिलेगी मुक्ति, 342 किमी लंबी बिछाई जाएगी सीवर लाइन

गोरखपुर|17 अप्रैल 2026
44 हजार घरों को सेप्टिक टैंक से मिलेगी मुक्ति,  342 किमी लंबी बिछाई जाएगी सीवर लाइन

गोरखपुर शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अमृत 2.0 योजना के तहत गोरखपुर नगर निगम क्षेत्र में 721 करोड़ 40 लाख 41 हजार रुपये की लागत से सीवरेज परियोजना लागू की जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से शहर के 17 वार्डों के करीब 43,604 घरों को सेप्टिक टैंक की समस्या से राहत मिलेगी।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से लगभग 1.95 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। अभी इन क्षेत्रों में अधिकतर घरों में सेप्टिक टैंक की व्यवस्था है, जिससे समय-समय पर सफाई और रखरखाव की समस्या बनी रहती है। सीवर लाइन बिछने के बाद न केवल इन झंझटों से छुटकारा मिलेगा, बल्कि शहर में स्वच्छता स्तर भी बेहतर होगा।

केंद्र, राज्य और नगर निगम की साझेदारी

इस परियोजना के लिए वित्तीय व्यवस्था भी बहुस्तरीय है। कुल लागत में केंद्र सरकार 231.34 करोड़ रुपये, राज्य सरकार 435.36 करोड़ रुपये और नगर निगम 27.76 करोड़ रुपये का योगदान देगा। इस तरह यह परियोजना केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से नगर निगम के स्तर पर क्रियान्वित की जाएगी।

342 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन और ट्रीटमेंट प्लांट

योजना के तहत शहर में 342.19 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाई जाएगी, जो गोड़धोइया नाला क्षेत्र से जुड़ी होगी। यहां से एकत्रित होने वाला सीवेज 38 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) क्षमता के निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में पहुंचाया जाएगा, जहां इसका वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जाएगा। इससे नालों और जल स्रोतों में गंदगी जाने की समस्या पर भी अंकुश लगेगा।

आधुनिक सुविधाएं भी होंगी शामिल

परियोजना के अंतर्गत दो आधुनिक सीवेज पंपिंग स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे, जो सीवेज के सुचारु प्रवाह को सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही 1060 किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट भी लगाया जाएगा, जिससे ऊर्जा की जरूरतों को आंशिक रूप से पूरा किया जा सकेगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

टेंडर प्रक्रिया दोबारा शुरू

उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) ने इस परियोजना को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिशासी अभियंता पंकज कुमार ने बताया कि पहले टेंडर में केवल एक ही फर्म के चयनित होने के कारण प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया था। अब पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया को पुनः शुरू किया गया है।

शहर के विकास में मील का पत्थर साबित होगी योजना

यह सीवरेज परियोजना गोरखपुर के शहरी विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। इससे न केवल लोगों को बेहतर स्वच्छता सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि जलभराव और प्रदूषण की समस्याओं में भी कमी आएगी। अधिकारियों का मानना है कि योजना के पूर्ण होने के बाद शहर की जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

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