पर्यटन के नक्शे पर चमकेगा गोरखपुर का औरंगाबाद: टेराकोटा गांव बनेगा स्पेशल टूरिस्ट विलेज, विकास कार्यों पर खर्च होंगे एक करोड़

टेराकोटा शिल्प के लिए प्रसिद्ध भटहट क्षेत्र का गांव औरंगाबाद पर्यटन के नक्शे पर भी खूब चमकेगा। पर्यटन विभाग इसे स्पेशल टूरिस्ट विलेज (विशेष पर्यटन गांव) के रूप में विकसित कर रहा है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए विभाग ने टेराकोटा गांव औरंगाबाद के पर्यटन विकास के लिए एक करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाई है। इस कार्ययोजना को पूर्ण करने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था, सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) को दी गई है।
टेराकोटा गांव में ग्रामीण पर्यटन विकास के लिए स्वीकृत 96.29 लाख रुपये में से पहली किस्त के रूप में 67 लाख रुपये जारी भी कर दिए गए हैं। पर्यटन विकास की इस परियोजना में गेट कॉम्प्लेक्स, विद्युत कार्य और साइनेज के कार्य कराए जाएंगे। औरंगाबाद गांव के पर्यटन विकास से गोरखपुर के प्रसिद्ध टेराकोटा शिल्प की वैश्विक पटल पर ब्रांडिंग भी मजबूत होगी।
ओडीओपी में शामिल होने पर मिली नई पहचान
गोरखपुर के टेराकोटा शिल्प से बने उत्पादों को प्रदेश सरकार ने एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल कर इसे नई पहचान दिलाई है। सरकार का प्रोत्साहन मिलने से टेराकोटा उत्पादों की मार्केटिंग और ब्रांडिंग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। मुख्यमंत्री खुद कई मंचों से इसकी ब्रांडिंग कर चुके हैं। अब सरकार ने टेराकोटा शिल्प को पर्यटन के साथ जोड़कर इसे नई ऊंचाई पर पहुंचाने की तैयारी की है। इसके तहत टेराकोटा शिल्प का मूल माने जाने वाले औरंगाबाद गांव को टूरिस्ट विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है।
होमस्टे और स्थानीय बाजार के बनेंगे मौके
सरकार की मंशा औरंगाबाद गांव को इस तरह विकसित करने की है, जिससे पर्यटक यहां आकर टेराकोटा उत्पादों को अपने-सामने बनता देख सकें। कई पर्यटक ओरिजिनल टेराकोटा उत्पादों को खरीदने की चाह रखते हैं, उनकी यह ख्वाहिश भी यहां आकर पूरी होगी। पर्यटन विभाग के उप निदेशक राजेंद्र प्रसाद यादव का कहना है कि टेराकोटा गांव औरंगाबाद में पर्यटन विकास की परियोजना को शीघ्रता से पूर्ण कराया जाएगा। पर्यटन विकास होने से टेराकोटा गांव में होमस्टे और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
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