होली के रंग में रंगा गोरखपुरः: हफ्ते भर पहले शुरु हुआ सेलिब्रेशन, खोया व कलर की दुकानों पर उमड़ रही भीड़

हर्ष व उल्लास के पर्व होली का रंग शहर की फिजाओं में घुल चुका है। मस्ती में सराबोर लोग स्कूल, काॅलेज व दफ्तरों में एक हफ्ते पहले से ही होली मनाना शुरु कर दिए हैं। लोगों के उत्साह को देखते हुए शहर के बाजार भी गुलजार हो गए हैं। सिटी के घंटाघर, गोलघर, रेती, असुरन, पांडेहाता और रुस्तमपुर जैसे बाजारों में रंग की दुकानें सज चुकी हैं। इस बार लोग केमिकल से बने रंगों की बजाय अबीर-गुलाल को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं, बच्चों में रंग-बिरंगी पिचकारियों, मुखौटे और टोपियों का क्रेज है। बाजार में लगातार बढ़ती भीड़ को देखकर शहर के व्यापारी भी खासा उत्साहित हैं। घंटाघर में रंग की दुकान लगाने वाले प्रवेश गुप्ता ने बताया कि इस समय बाजार में सबसे ज्यादा अबीर-गुलाल की बिक्री हो रही है। इसमें भी केसरिया व गुलाबी रंग के गुलाल की मांग सबसे ज्यादा है। केमिकल कलर की मांग बहुत ही कम है।

हर्बल रंगों कि बिक्री में आई कमी
रेती के व्यापारी रमाशंकर गुप्ता ने बताया कि अबीर-गुलाल की बिक्री तो खूब बढ़ी है, लेकिन हर्बल रंगों को लेकर ग्राहकों का उत्साह कम होता जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण कीमत का अधिक होना है। रमाशंकर ने बताया कि हर्बल रंग अलग-अगल तरह के फूलों से बनता है। थोड़ा सा हर्बल रंग तैयार करने में कई तरह के फूलों का इस्तेमाल होता है। यही कारण है कि यह महंगा बिकता है और लोग इसे खरीदने में कम रुचि लेते हैं।

मेवा-खोया की दुकानों पर उमड़ रही भीड़
होली का त्योहार हो और गुझिया व मिठाइयां खाने को न मिलें, ऐसा हो ही नहीं सकता। इन्हें तैयार करने में काफी सारा मेवा व खोया लगता है। एक ओर जहां लोग रंगों को खरीदने में क्वालिटी का ध्यान दे रहे हैं तो वहीं खोया व मेवा की दुकानों पर लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं। उधर, पवित्र रमजान माह होने के चलते इफ्तारी पार्टी में भी इसका खूब सेवन हो रहा है। ऐसे में खोया व मेवा की मांग कई गुना बढ़ गई है।

होली के मुखौटे की भारी डिमांड
सेलिब्रेशन का ट्रेंड बदलने के साथ ही युवा व बच्चे मुखौटा व टोपी लगाकर होली का आनंद लेने लगे हैं। हाई डिमांड को देखते हुए व्यापारियों ने भी अपने स्टाॅक फुल कर लिए हैं। बाजारों में 20 से अधिक शक्ल वाले मुखौटे व टोपियां मिल रही हैं। टोपी की दुकान लगाने वाले नदीम सिद्दीकी ने बताया कि रोजाना 100 से अधिक टोपी व मुखौटे बिक रहे हैं।
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