गोरखपुर में वंदे भारत डिपो पर ब्रेक: सहजनवा का प्रस्ताव खारिज, अब महुआपार में नई जमीन की तलाश

गोरखपुर में वंदे भारत ट्रेनों के विस्तार को लेकर इंतजार और लंबा हो सकता है। डिपो निर्माण की योजना फिलहाल अटक गई है। सहजनवा में प्रस्ताव पहले ही खारिज हो चुका है। इसके बाद अब पूर्वोत्तर रेलवे नई जगह की तलाश में जुट गया है। अब तक जिन लोकेशनों का सर्वे किया गया, वहां पर्याप्त जमीन नहीं मिल पाई। यही वजह है कि प्रोजेक्ट में देरी तय मानी जा रही है। लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। रेलवे अब निजी और सरकारी दोनों तरह की जमीन पर फोकस कर रहा है।
रेलवे ने शुरुआत में गोरखपुर और भटनी में जमीन तलाशने की कोशिश की थी। लेकिन दोनों जगह पर्याप्त स्पेस नहीं मिला। इसके बाद सहजनवा में प्रस्ताव तैयार किया गया था। लेकिन तकनीकी और जमीन से जुड़ी दिक्कतों के कारण इसे खारिज कर दिया गया। अब अधिकारियों की नजर भीटी रावत के महुआपार इलाके पर है। महुआपार में रेलवे लाइन और हाईवे के बीच की जमीन को चिह्नित किया गया है। यहां सर्वे का काम पूरा हो चुका है। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक यहां डिपो के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। इसी वजह से इस लोकेशन को फिलहाल सबसे मजबूत विकल्प माना जा रहा है। अंतिम फैसला अभी बाकी है, लेकिन उम्मीद यहीं टिक गई है।
200 करोड़ के प्रोजेक्ट पर मंथन जारी
इस डिपो प्रोजेक्ट की लागत करीब 200 करोड़ रुपये आंकी गई है। रेलवे और संबंधित विभाग इस पर लगातार मंथन कर रहे हैं। फंडिंग, जमीन अधिग्रहण और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा जारी है। अभी तक किसी भी स्तर पर फाइनल अप्रूवल नहीं मिला है। लेकिन महुआपार को लेकर पॉजिटिव संकेत मिल रहे हैं। अगर सब कुछ सही रहा तो यहां काम शुरू हो सकता है।
पहले भी कई जगह हुई तलाश
डिपो के लिए रेलवे ने कई इलाकों में जमीन देखी थी। मानीराम, पीपीगंज और नकहा जंगल जैसे क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया। लेकिन हर जगह एक ही समस्या सामने आई। जमीन कम पड़ गई। न्यू वाशिंग पिट में भी विकल्प तलाशा गया। वहां भी स्पेस पर्याप्त नहीं था। रेलवे बोर्ड के नियम के मुताबिक वंदे भारत डिपो के लिए कम से कम एक किलोमीटर लंबी जमीन जरूरी होती है। खासकर वाशिंग पिट और मेंटेनेंस यार्ड के लिए बड़ी जगह चाहिए। यही वजह है कि सही लोकेशन ढूंढना चुनौती बन गया है।
क्यों जरूरी है डिपो
वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन के लिए डिपो बेहद जरूरी होता है। यहां ट्रेनों की सफाई होती है। धुलाई और तकनीकी जांच भी यहीं होती है। किसी भी खराबी को ठीक करने का काम भी डिपो में ही किया जाता है। फिलहाल गोरखपुर के न्यू वाशिंग पिट में किसी तरह दो वंदे भारत ट्रेनों का मेंटेनेंस किया जा रहा है। ये ट्रेनें गोरखपुर-लखनऊ-प्रयागराज और गोरखपुर-पाटलिपुत्र रूट पर चल रही हैं। लेकिन तीसरी ट्रेन के लिए जगह नहीं बची है। गोरखपुर-आगरा रूट की ट्रेन के लिए कोचिंग डिपो ने साफ मना कर दिया है। इससे साफ है कि नया डिपो अब जरूरत बन चुका है।
भविष्य की बड़ी प्लानिंग
रेलवे गोरखपुर को एक बड़े रेल हब के रूप में विकसित करना चाहता है। आने वाले समय में दिल्ली, आगरा और बनारस के लिए और वंदे भारत ट्रेनें चलाने की योजना है। इसके साथ ही अमृत भारत ट्रेनों को भी शुरू करने की तैयारी है। सात जुलाई 2023 को नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर जंक्शन से पहली वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। इसके बाद से इस क्षेत्र में हाई-स्पीड ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन डिपो की कमी इस प्लान में सबसे बड़ी रुकावट बन गई है।
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