गोरखपुर में लो वोल्टेज संकट: 33 हजार की जगह 30 हजार वोल्ट सप्लाई, बढ़ती गर्मी से बढ़ी बिजली की डिमांड

गोरखपुर में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट गहराने लगा है। उमस और तापमान बढ़ने के साथ बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसका सीधा असर वोल्टेज पर पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि पारेषण उपकेंद्रों से निकला 33 हजार वोल्ट करंट वितरण उपकेंद्र तक पहुंचते-पहुंचते करीब 30 हजार वोल्ट ही रह जा रहा है। इससे शहर के कई इलाकों में लो वोल्टेज की समस्या बढ़ गई है। शाहपुर, बक्शीपुर और राप्तीनगर जैसे क्षेत्रों में लोगों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। वोल्टेज कम होने से तारों पर दबाव बढ़ गया है। इससे तार टूटने का खतरा भी बढ़ रहा है।
आमतौर पर लो वोल्टेज की समस्या मई और जून में ज्यादा देखने को मिलती है। लेकिन इस बार अप्रैल में ही हालात बिगड़ने लगे हैं। कारण साफ है। इस साल गर्मी जल्दी और ज्यादा पड़ रही है। उमस भी ज्यादा है। इससे कूलर, एसी और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ गया है। बिजली की मांग अचानक बढ़ गई है। सप्लाई सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा है। शाम होते ही स्थिति और खराब हो जाती है। पांच बजे से रात 12 बजे तक पीक आवर रहता है। इस दौरान बिजली की खपत सबसे ज्यादा होती है। जैसे-जैसे मांग बढ़ती है, वोल्टेज गिरने लगता है। कई इलाकों में घरेलू वोल्टेज 240 से गिरकर 180-190 तक पहुंच जा रहा है। इससे पंखे धीमे चल रहे हैं। कूलर और एसी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
तारों पर बढ़ा दबाव
लो वोल्टेज का असर सिर्फ उपकरणों पर नहीं पड़ रहा है। इसका असर बिजली की लाइनों पर भी दिख रहा है। वोल्टेज कम होने से करंट का संतुलन बिगड़ रहा है। तारों में घर्षण बढ़ रहा है। इससे तार गर्म हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में तार टूटने या फॉल्ट होने का खतरा बढ़ जाता है। बिजली विभाग के अभियंताओं का कहना है कि अगर समय रहते लोड कंट्रोल नहीं किया गया तो समस्या और गंभीर हो सकती है। खासकर पुराने इलाकों में जहां वायरिंग सिस्टम पुराना है, वहां ज्यादा खतरा है।
ट्रांसफार्मर से दूरी बढ़ी
शहर में लो वोल्टेज की समस्या हर जगह एक जैसी नहीं है। ट्रांसफार्मर के पास रहने वाले लोगों को अपेक्षाकृत बेहतर सप्लाई मिल रही है। लेकिन जैसे-जैसे दूरी बढ़ती है, वोल्टेज गिरता जाता है। दूर के इलाकों में समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है। इसका कारण लाइन लॉस और लोड का असंतुलन बताया जा रहा है। लंबी दूरी में करंट कमजोर हो जाता है। इससे अंतिम छोर तक पर्याप्त वोल्टेज नहीं पहुंच पाता।
लोड बैलेंसिंग पर काम शुरू
बढ़ते दबाव को देखते हुए बिजली विभाग ने लोड बैलेंसिंग का काम तेज कर दिया है। अभियंता ट्रांसफार्मरों पर तीनों फेज में बराबर-बराबर लोड बांट रहे हैं। जहां किसी एक फेज पर ज्यादा उपभोक्ता हैं, वहां से कुछ कनेक्शन दूसरे फेज में शिफ्ट किए जा रहे हैं। इससे सिस्टम पर दबाव कम करने की कोशिश की जा रही है। विभाग का मानना है कि इससे वोल्टेज की समस्या कुछ हद तक नियंत्रित हो सकती है। हालांकि यह अस्थायी समाधान है।
अर्थिंग सिस्टम को किया जा रहा मजबूत
बिजली सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए अर्थिंग सिस्टम पर भी काम किया जा रहा है। पारेषण उपकेंद्रों में ट्रांसफार्मरों की अर्थिंग में पानी डाला जा रहा है। कई जगह पंपिंग सेट के जरिए ट्रांसफार्मर यार्ड में पानी भरा जा रहा है। अभियंताओं के अनुसार, इससे मिट्टी की नमी बनी रहती है। मिट्टी की प्रतिरोधकता कम होती है। इससे करंट का प्रवाह बेहतर होता है। ट्रांसफार्मर पर लोड का असर भी कम पड़ता है।
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