गोरखपुर हत्याकांड में बड़ा मोड़: हाईकोर्ट ने आरोपी की गिरफ्तारी को बताया अवैध, तत्काल रिहाई के आदेश

गोरखपुर|04 मई 2026
हाईकोर्ट ने आरोपी की गिरफ्तारी को बताया अवैध, तत्काल रिहाई के आदेश

गोरखपुर के चर्चित राजकुमार चौहान हत्याकांड में एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में आरोपी बनाए गए लालजी यादव उर्फ गट्टू की गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि गिरफ्तारी के दौरान जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर अदालत ने तत्काल रिहाई के आदेश जारी कर दिए। आदेश मिलते ही जेल प्रशासन ने बिना देरी किए लालजी यादव को रिहा कर दिया। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस गंभीर चूक की जांच की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को उसके खिलाफ कारणों की जानकारी नहीं दी गई। इतना ही नहीं, उसके परिवार को भी इस बारे में सूचित नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन बताया। अदालत ने रिमांड मजिस्ट्रेट द्वारा 21 मार्च 2026 को जारी आदेश को भी निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी में पारदर्शिता और नियमों का पालन अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए अदालत ने इस प्रक्रिया को बेहद गंभीर चूक बताया।

जांच अधिकारी पर कार्रवाई के निर्देश

हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि तीन दिन के भीतर कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही आदेश की प्रति जिला जज और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भेजने का निर्देश भी दिया गया है। अदालत ने रिमांड मजिस्ट्रेट को भविष्य में अधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है।

हत्या की वारदात और शुरुआती कार्रवाई

17 मार्च की सुबह बरगदवा निवासी भाजपा नेता राजकुमार चौहान पर चाकू और गोली से हमला किया गया था। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस मामले में उनकी पत्नी की तहरीर पर कई नामजद और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए मुख्य आरोपी राज चौहान उर्फ निरहू और विपिन यादव को कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद साजिश और साक्ष्य छिपाने के आरोप में अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया।

साजिश का खुलासा और गैंग कनेक्शन

जांच में सामने आया कि हत्या की साजिश लंबे समय से रची जा रही थी। कॉल डिटेल और सीसीटीवी फुटेज से कई अहम सुराग मिले। पुलिस के अनुसार, हत्या में इस्तेमाल हथियार मनीष यादव ने उपलब्ध कराया था, जो कथित रूप से लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ है। घटना के बाद सबूत मिटाने की भी कोशिश की गई। खून से सने कपड़े जलाए गए और हथियार छिपाए गए। पुलिस ने बाद में हथियार बरामद कर लिए।

परिवार की नाराजगी और जांच ट्रांसफर

मृतक की पत्नी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि असली साजिशकर्ता अभी भी बाहर हैं और गिरफ्तार लोग सिर्फ मोहरे हैं। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। परिवार की शिकायत के बाद केस को चिलुआताल थाने से हटाकर गोरखनाथ थाने को ट्रांसफर कर दिया गया है। अब इस केस की मॉनिटरिंग सीनियर अफसर कर रहे हैं।

आगे की कार्रवाई और पुलिस का पक्ष

एसपी नॉर्थ ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट ने केवल रिमांड प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विवेचना पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी और जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी। फिलहाल इस केस में कई आरोपी जेल में हैं और जांच जारी है।

नव्य जागरण

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