गोरखपुर में मासूम से हैवानियत पर इंसाफ : 8 साल बाद मिला न्याय, दोषी को मिली 10 साल की सजा

गोरखपुर|23 अप्रैल 2026
8 साल बाद मिला न्याय,  दोषी को मिली 10 साल की सजा

गोरखपुर के गुलरिहा इलाके से न्याय की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां की एक विशेष कोर्ट ने 12 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को कड़ी सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पूर्णवासी उर्फ नाटे को 10 साल के कठोर कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही उस पर 15 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। कानून के मुताबिक अगर दोषी जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे 6 महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

करीब 8 साल के लंबे इंतजार के बाद जब पीड़ित परिवार को इंसाफ मिला, तो सबकी आंखें नम हो गईं। उत्तर प्रदेश पुलिस के 'ऑपरेशन कनविक्शन' के तहत इस केस की प्रभावी पैरवी की गई। पुलिस और अभियोजन पक्ष की मुस्तैदी के कारण ही अपराधी को उसके अंजाम तक पहुंचाया जा सका।

रक्षाबंधन की रात वारदात को दिया था अंजाम

यह झकझोर देने वाली घटना साल 2018 की है। उस समय पूरा देश रक्षाबंधन का त्यौहार मना रहा था। 26 और 27 अगस्त की दरमियानी रात गुलरिहा थाना क्षेत्र के एक गांव में यह हैवानियत हुई थी। घर की महिलाएं किसी काम से बाहर गई हुई थीं। 12 साल की बच्ची घर में बिल्कुल अकेली थी। आरोपी पूर्णवासी उर्फ नाटे ने इसी बात का फायदा उठाया। वह देर रात करीब तीन बजे दीवार फांदकर बच्ची के कमरे में घुस गया। मासूम उस वक्त गहरी नींद में सो रही थी। दरिंदे ने बच्ची का मुंह दबाकर उसके साथ रेप किया। इस घटना ने समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। त्यौहार के दिन हुई इस वारदात से पूरा इलाका सहम गया था।

कानूनी लड़ाई और 'ऑपरेशन कनविक्शन' का बड़ा असर

सुबह जब घरवाले वापस लौटे, तो बच्ची की हालत देख उनके होश उड़ गए। पीड़िता ने रो-रोकर अपनी आपबीती सुनाई। इसके तुरंत बाद बच्ची के बड़े भाई ने गुलरिहा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। कोर्ट में यह मामला पिछले 8 वर्षों से विचाराधीन था। विशेष लोक अभियोजक उमेश मिश्रा और संजीत कुमार शाही ने अभियोजन की ओर से मजबूती से पक्ष रखा। उत्तर प्रदेश सरकार के 'ऑपरेशन कनविक्शन' अभियान ने इस केस को नई गति दी। इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में जल्द से जल्द सजा दिलाना है। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों को समय पर कोर्ट में पेश किया, जिससे आरोपी का बचना नामुमकिन हो गया।

कोर्ट का फैसला

बुधवार को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) राकेश कुमार की अदालत में इस मामले का अंतिम फैसला सुनाया गया। कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पूर्णवासी उर्फ नाटे को दोषी करार दिया। जैसे ही जज ने 10 साल की सजा का ऐलान किया, कोर्ट परिसर में मौजूद पीड़ित परिवार फूट-फूटकर रोने लगा। परिजनों ने रुंधे गले से कहा कि इस दरिंदे ने उनकी बच्ची का बचपन और भविष्य दोनों बर्बाद कर दिया था। 8 साल तक उन्होंने पल-पल इंसाफ का इंतजार किया है। परिवार के सदस्यों ने न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से अपराधियों में कानून का खौफ पैदा होगा। यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देता है कि मासूमों के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अब दोषी को अपने पापों का प्रायश्चित जेल की सलाखों के पीछे करना होगा।

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