गोरखपुर में SBI मैनेजर से 42.50 लाख की साइबर ठगी: शेयर मार्केट में ‘बंपर प्रॉफिट’ के झांसे में फंसे, फर्जी IPO और ट्रेडिंग ऐप ने किया बर्बाद

गोरखपुर|07 मई 2026
शेयर मार्केट में ‘बंपर प्रॉफिट’ के झांसे में फंसे, फर्जी IPO और ट्रेडिंग ऐप ने किया बर्बाद

SBI के एक मैनेजर के साथ शहर में 42 लाख 50 हजार रुपए की बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया है। शेयर बाजार में ज्यादा मुनाफा कमाने की चाहत उन्हें ऐसे जाल में ले गई, जहां से बाहर निकलना आसान नहीं था। ठगों ने पहले भरोसा जीता, फिर फर्जी ट्रेडिंग और IPO निवेश के नाम पर धीरे-धीरे लाखों रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। जब पीड़ित ने पैसा निकालना चाहा, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

घटना के बाद बैंक मैनेजर कई दिनों तक सदमे में रहे। आखिरकार उन्होंने बुधवार को साइबर क्राइम थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित नीरज कुमार के मुताबिक जनवरी के आखिर और फरवरी की शुरुआत में उन्हें व्हाट्सएप पर दो निवेश समूहों में जोड़ा गया। इन ग्रुप्स में खुद को शेयर मार्केट एक्सपर्ट बताने वाले लोग मौजूद थे। वे हर दिन ऑनलाइन सेशन करते थे और शेयर बाजार में मोटे मुनाफे के दावे करते थे। ग्रुप में कई ऐसे लोग भी शामिल दिखाए जाते थे, जो लगातार लाखों का प्रॉफिट कमाने की बात करते थे। स्क्रीनशॉट शेयर किए जाते थे। ट्रेडिंग के फर्जी रिजल्ट दिखाए जाते थे। माहौल ऐसा बनाया गया कि हर सदस्य को लगे कि यहां पैसा लगाकर कम समय में बड़ा फायदा हो सकता है। धीरे-धीरे नीरज कुमार का भरोसा भी इन लोगों पर बढ़ने लगा।

विदेशी निवेशक और बड़े फंड का नाम लेकर किया विश्वास हासिल

ठगों ने खुद को बड़े निवेश नेटवर्क और विदेशी संस्थागत निवेशकों से जुड़ा बताया। उन्होंने कई फर्जी डॉक्यूमेंट और कथित ट्रेडिंग रिपोर्ट भी शेयर कीं। दावा किया गया कि उनके पास “प्री-ओपन मार्केट ट्रेडिंग” की खास जानकारी होती है, जिससे सामान्य निवेशकों की तुलना में कई गुना ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके बाद नीरज कुमार को एक मोबाइल ऐप डाउनलोड कराया गया। उसी ऐप के जरिए उनका ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाया गया। शुरुआत में उनसे छोटी रकम निवेश कराई गई। ऐप पर कुछ ही दिनों में अच्छा मुनाफा दिखने लगा। यही वह ट्रिक थी, जिससे ठगों ने उनका पूरा भरोसा जीत लिया।

पहले दिखाया प्रॉफिट… फिर IPO में लगवा दिए लाखों रुपए

कुछ समय तक खाते में लगातार फायदा दिखाया जाता रहा। नीरज कुमार को लगने लगा कि वह सही प्लेटफॉर्म पर निवेश कर रहे हैं। इसके बाद ठगों ने उन्हें बड़े IPO और खास निवेश योजनाओं का लालच दिया। कहा गया कि अगर ज्यादा पैसा लगाया जाए तो बहुत बड़ा रिटर्न मिलेगा। धीरे-धीरे उन्होंने लाखों रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। ऐप में उनका बैलेंस और प्रॉफिट लगातार बढ़ता दिख रहा था। लेकिन असली खेल तब शुरू हुआ, जब उन्होंने पैसे निकालने की कोशिश की। हर बार कोई न कोई बहाना बनाया जाने लगा। कभी टैक्स का हवाला दिया गया। कभी प्रोसेसिंग फीस मांगी गई। कभी अकाउंट वेरिफिकेशन के नाम पर भुगतान रोक दिया गया। इसके बाद उन्हें शक हुआ।

जांच में खुली फर्जीवाड़े की पूरी परत

नीरज कुमार ने जब खुद से जांच शुरू की तो पता चला कि जिन कंपनियों और इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम का हवाला दिया जा रहा था, वे पूरी तरह फर्जी थे। ऐप भी संदिग्ध निकला। तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम थाने में शिकायत दी। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह बेहद सुनियोजित फ्रॉड था। ऐसे मामलों में ठग पहले निवेशक को शुरुआती मुनाफा दिखाते हैं। इससे व्यक्ति का भरोसा मजबूत हो जाता है। फिर उसे बड़ी रकम निवेश करने के लिए उकसाया जाता है। जब तक पीड़ित को सच्चाई समझ आती है, तब तक पैसा कई खातों और डिजिटल चैनलों के जरिए गायब किया जा चुका होता है।

खातों की हो रही ट्रैकिंग

साइबर क्राइम थाना अब तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रहा है। जिन बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर हुआ, उनकी जांच की जा रही है। मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप चैट, ऐप डिटेल और डिजिटल ट्रांजैक्शन का डेटा भी खंगाला जा रहा है। पुलिस का कहना है कि हाल के दिनों में शेयर मार्केट और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर साइबर ठगी तेजी से बढ़ी है। खासकर व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।