टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा गोरखपुर: नौ साल में पर्यटन विकास के दर्जनों काम हुए, तीन फाइव स्टार होटलों की मिली सुविधा

योगी सरकार के नौ वर्षों का कार्यकाल गोरखपुर में पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए भी बेमिसाल साबित हुआ है। कभी माफियागिरी, पिछड़े और बीमारू के तमगे वाले गोरखपुर के कदम टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में भी तेजी से बढ़े हैं। बीते नौ सालों में दर्जनों पर्यटन विकास के कार्य होने से गोरखपुर की पहचान पूर्वी यूपी के नव पर्यटन केंद्र के रूप में होने लगी है। पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं के आकार लेने से यह हॉस्पिटैलिटी के हब के रूप में भी उभरने लगा है। फाइव स्टार होटलों की खड़ी होती श्रृंखला, सेवन डी थिएटर वाला जू, रामगढ़ताल व चिलुआताल जैसी नैसर्गिक झीलों का टूरिस्ट स्पॉट के रूप में कायाकल्प, वाटर एडवेंचर की गतिविधियां और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट का होना इसकी बानगी भर है। यह देखना सुखद है कि अपराध से जुड़ी छवि वाले जिस शहर में बाहर के लोग आने से कतराते थे वहां अब वैश्विक ख्याति के तीन फाइव स्टार होटल रैडिसन ब्लू, मैरियट और रमाडा में भीड़ लगी रहती है। आने वाले समय में यहां होटल ताज की सेवा भी पर्यटकों को मिलने लगेगी।
बौद्ध सर्किट का सेंटर है गोरखपुर
गोरखपुर भौगोलिक रूप से बौद्ध सर्किट के केंद्र में स्थित है। तथागत बुद्ध से जुड़े चार प्रमुख स्थानों सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु और लुम्बिनी जाने वाले अधिकांश पर्यटक यहीं से होकर जाते हैं। पर, कुछ साल पहले तक देश के अन्य राज्यों और विदेशी पर्यटकों के अनुरूप हॉस्पिटैलिटी सेक्टर था ही नहीं। तब गोरखपुर में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के ऐसे आकर्षण की जरूरत थी जो बाहर से आने वाले पर्यटकों को गोरखपुर में रुकने को विवश कर सके।
1700 एकड़ में फैला है रामगढ़ताल
एक लंबे समय तक गोरखपुर में पर्यटन स्थल के रूप में सर्वाधिक फुटफाल वाला स्थान सिर्फ गोरखनाथ मंदिर ही था। पर, अब इस मंदिर के बाद पर्यटन स्थल के रूप में नए केंद्र भी विकसित हो चुके हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम रामगढ़ताल और गोरखपुर के चिड़ियाघर का है। गोरखपुर में पर्यटन के क्षेत्र में रामगढ़ताल कायाकल्प का सबसे बड़ा उदाहरण है। दशकों तक उपेक्षित और गंदगी के पर्याय बन रहे 1700 एकड़ में फैले इस प्राकृतिक रामगढ़ताल ताल पर सरकार ने ऐसी संजीदगी दिखाई कि आज इसकी गिनती पूर्वी उत्तर प्रदेश के खूबसूरत व दर्शनीय पर्यटन स्थल के रूप में अग्रपंक्ति में है। आज यह ताल सैलानियों का मनभावन है तो बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम। यही नहीं, बड़े पैमाने पर यहां फिल्मों की शूटिंग हो रही है। रामगढ़ताल में कई तरह की आकर्षक और रोमांचक नावों की सवारी का आनंद भी पर्यटकों को मुंबई और गोवा की ही तरह मिल रहा है। रामगढ़ताल से सटे पर्यटन विभाग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर का वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी बनवा दिया है। यह प्रदेश का सार्वजनिक क्षेत्र का पहला वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है। यहां खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स की रोइंग प्रतियोगिता का सफल आयोजन हो चुका है और अब स्थानीय युवाओं को रोइंग की ट्रेनिंग मिल रही है। रामगढ़ताल की ही तर्ज पर शहर के उत्तरी छोर पर स्थित चिलुआताल का भी कायाकल्प हो चुका है।
चिड़ियाघर से इको टूरिज्म की शुरुआत
गोरखपुर में इको टूरिज्म की भी शुरुआत हो चुकी है। शहीद अशफाक उल्ला खां के नाम पर बने चिड़ियाघर में दुर्लभ वन्य जीवों को देखने के लिए पूरे पूर्वांचल से लोग यहां आ रहे हैं तो चिड़ियाघर का 7-डी थिएटर पर्यटकों को खूब रोमांचित कर रहा है। चिड़ियाघर के साथ ही गोरखपुर वन प्रभाग के तहत कैम्पियरगंज रेंज में दुनिया का पहला राजगिद्ध (जटायु) संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र भी बन चुका है। गोरखपुर में निखरे पर्यटन सेक्टर के चलते होटल और हॉस्पिटैलिटी सेवा क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन की मांग को देखते हुए प्रदेश का पहला स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट भी गोरखपुर में बन गया है। जल्द ही यहां पाठ्यक्रमों की शुरुआत भी हो जाएगी।
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