हाईकोर्ट ने जीडीए को दी 31 मार्च तक की मोहलत: झारखंडी के मुआवजे ने पकड़ा तूल, कास्तकारों की मांग बाजार रेट से मिले मुआवजा

झारखंडी टुकड़ा नम्बर-1 के मुआवजे से जुड़ा मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जीडीए को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने प्रभावित भूस्वामियों को 31 मार्च तक मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही भुगतान की रिपोर्ट अगली सुनवाई तक जमा करने को कहा है। कोर्ट का आदेश आने के बाद झारखंडी आवास बचाओ संघर्ष समिति ने जीडीए के अधिकारियों को ज्ञापन देकर मार्केट रेट से मुआवजा देने की मांग की।
यह है पूरा मामला
झारखंडी आवास बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष बृजपाल सिंह ने बताया कि साल 2009 में जब रामगढ़ ताल के किनारे बांध निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब इसे ताल की भूमि के भीतर बनाना प्रस्तावित था। लेकिन जीडीए के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से इस बांध को झारखंडी टुकड़ा नंबर-1 के काश्तकारों की जमीन में बना दिया गया। न्यायालय के निर्देश पर पैमाइश हुई। इसके बाद भी किसानों की जमीन में मौजूद है। बृजपाल ने कहा कि बांध के निर्माण के लिए कास्तकारों की जो जमीन ली गई उसका कोई मुआवजा नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि पहले मुआवजा देकर ही रिंगरोड का निर्माण किया जाए, लेकिन जीडीए के अधिकारियों की मानमानी कुछ ऐसी हावी है कि उन्होंने फोर्स लगाकर जबरदस्ती काम करा लिया। अब कोर्ट ने जीडीए को 31 मार्च तक मुआवजा देकर संबंधित फाइल अगली तारीख तक पेश करने का आदेश दिया है।
औने-पौने दाम पर लेना चाह रहे जमीन
बृजपाल सिंह ने कहा जीडीए हमारी जमीनों को औने-पौने दाम पर जबरदस्ती लेना चाहता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जीडीए हमें जो मुआवजा दे रहा है, वह मार्केट रेट से काफी कम है। हमारी जमीन की कीमत 200 रुपये स्क्वॉयर फीट लगाई है। उसका पौने दो गुना यानी 375 रुपये स्क्वॉयर फीट के हिसाब से हमें मुआवजा दिया जा रहा है जो काफी कम है। हमारी जमीन एम्स के पास है जो काफी कीमती है। वर्तमान में यहां जमीन की कीमत 12 हजार 600 रुपये स्क्वॉयर फिट है। इसी से सटे आवास-विकास की जमीन है। जिसका रेट 27 हजार रुपये वर्ग मीटर है। यहां कमर्शियल प्लॉट की कीमत 60 हजार रुपये वर्गमीटर है। उन्होंने मुआवजे से जुड़े कानून का जिक्र करते हुए कहा कि सर्किल रेट और मार्केट रेट में जो भी सबसे अधिक होगा उसको बेस माना जाना चाहिए। इसी आधार पर शहरी क्षेत्र में दोगुना और देहात क्षेत्र में चार गुना मुआवजा देना होगा। ज्ञापन में झारखंडी आवास बचाओ संघर्ष समिति के 31 सदस्य शामिल थे। जीडीए सचिव पुष्पराज सिंह को ज्ञापन देने के दौरान समिति के उपाध्यक्ष विनोद कुमार यादव, मंजू सिंह, राजेन्द्र पाठक, राधवेन्द्र प्रताप सिंह, अरविंद राय, राकेश प्रताप शाही, निलेश कुमार सिंह, प्रियंका शाही, माया देवी, राजमणी देवी, मीना देवी, वीना देवी आदि मौजूद रहे।
कोर्ट के आदेश का होगा पालन
ज्ञापन के संबंध में जीडीए वीसी आनंद वर्धन ने कहा, झारखंडी आवास बचाओ समिति से जुड़ा मामला संज्ञान में आया है। कोर्ट ने मुआवजे को लेकर आदेश जारी किया है। उच्च न्यायालय के फैसले के मुताबिक कास्तकारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।










