जनगणना ड्यूटी में बड़ी गड़बड़ी: मृतक और गंभीर मरीजों की भी लगा दी ड्यूटी, कर्मचारियों की शुरू हो गई ट्रेनिंग

गोरखपुर|25 अप्रैल 2026
मृतक और गंभीर मरीजों की भी लगा दी ड्यूटी, कर्मचारियों की शुरू हो गई ट्रेनिंग

गोरखपुर में आगामी जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हैं। लेकिन इसी बीच ड्यूटी आवंटन में बड़ी लापरवाही सामने आई है। कई जिलों से शिकायतें आ रही हैं कि ड्यूटी लिस्ट में भारी अनियमितताएं हैं। हालात ऐसे हैं कि मृतक कर्मचारियों के नाम भी सूची में शामिल कर दिए गए। इतना ही नहीं, दिव्यांग, कैंसर पीड़ित और गर्भवती शिक्षिकाओं को भी जनगणना का काम सौंप दिया गया है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। लोग लगातार अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।

सबसे हैरान करने वाला मामला एक मृतक शिक्षा मित्र का सामने आया। पुरुषोत्तम प्रसाद का नाम भी ड्यूटी सूची में शामिल कर दिया गया। इस घटना ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके अलावा कई ऐसे कर्मचारी भी सूची में शामिल हैं जो शारीरिक रूप से ड्यूटी करने में सक्षम नहीं हैं। इससे यह साफ हो गया है कि डाटा अपडेट करने में गंभीर लापरवाही हुई है।

दिव्यांग और बीमार कर्मचारियों को भी नहीं मिली राहत

ड्यूटी लिस्ट में कई दिव्यांग शिक्षकों के नाम भी सामने आए हैं। इनमें सुनीता सिंह, आस्था शुक्ला और गीता पांडेय जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा आफताब आलम और विजय प्रताप सिंह जैसे अन्य शिक्षकों को भी ड्यूटी दी गई है। वहीं कैंसर से जूझ रहे अरुण सिंह और शाहीन बानो को भी इस सूची में शामिल किया गया है। इन सभी ने इसे अमानवीय बताया है।

गर्भवती और प्रसूता शिक्षिकाएं भी परेशान

ड्यूटी लिस्ट में गर्भवती और हाल ही में मां बनी शिक्षिकाओं के नाम भी सामने आए हैं। अंजू सिंह और नीतू सिंह जैसी प्रसूता महिलाओं को भी काम सौंपा गया है। वहीं प्रतिमा मौर्य, लरेब अफरोज और प्रियंका मौर्य जैसी गर्भवती शिक्षिकाएं भी इस लिस्ट में शामिल हैं। इनका कहना है कि छोटे बच्चों की देखभाल और स्वास्थ्य समस्याओं के बीच घर-घर जाकर काम करना संभव नहीं है।

अधिकारियों के दफ्तरों में बढ़ी भीड़

22 मई से 22 जून तक चलने वाली जनगणना के लिए ट्रेनिंग भी शुरू हो चुकी है। मकान सूचीकरण और गणना का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लेकिन इस गड़बड़ी के चलते बड़ी संख्या में कर्मचारी शिकायत लेकर अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं। जिलाधिकारी, एसडीएम, नगर आयुक्त और बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में भीड़ बढ़ गई है। खासकर महिला कर्मचारियों की शिकायतें ज्यादा हैं। वे अपनी ड्यूटी हटाने की मांग कर रही हैं।

प्रशासन का जवाब और कार्रवाई

इस मामले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र त्रिपाठी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि मृतक कर्मचारी का नाम पोर्टल से हटा दिया गया है। अन्य मामलों में भी शिकायतों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। साथ ही उच्च अधिकारियों को भी इस बारे में जानकारी दी जा रही है।

नैतिक कर्तव्य बनाम मानवीय संवेदनाएं

अधिकारी जहां इसे जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य से जोड़ रहे हैं, वहीं कर्मचारी मानवीय पहलुओं की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जनगणना करना सभी का नैतिक कर्तव्य है। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य और व्यक्तिगत परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह विवाद अब प्रशासन और कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर रहा है।

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