गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक रफ्तार का मेगा कॉरिडोर: 90 ब्रिज और तीन इंटरचेंज से बदलेगी पूर्वांचल की तस्वीर, कुशीनगर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी होगी बेहतर

पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर का नया अध्याय लिखने जा रहा गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे अब तेजी से जमीन पर उतरता दिख रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए ढांचागत विकास की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली है। इस एक्सप्रेसवे में गोरखपुर और कुशीनगर के बीच तीन बड़े इंटरचेंज, करीब 90 ब्रिज और अंडरपास बनाए जाएंगे। यह परियोजना न केवल यातायात को आसान बनाएगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगी।
इस एक्सप्रेसवे की शुरुआत गोरखपुर के जंगल कौड़िया कालेसर फोरलेन स्थित नैयापार खुर्द से होगी। यहां एक बड़ा इंटरचेंज बनाया जाएगा। इसके अलावा एनएच-727 पर दीगहा बुजुर्ग और एनएच-730 पर तमकुहीराज में भी इंटरचेंज प्रस्तावित हैं। खास बात यह है कि कसया रोड पर कुशीनगर एयरपोर्ट के पास एक इंटरचेंज दिया गया है। इससे गोरखपुर और कुशीनगर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाएगी। आने वाले समय में यह एयर ट्रैवल और रोड कनेक्टिविटी का बड़ा हब बन सकता है।
ब्रिज और अंडरपास से होगा स्मूद ट्रैफिक
इस एक्सप्रेसवे पर कुल 90 ब्रिज और अंडरपास बनाए जाएंगे। इसमें दो मेजर ब्रिज कुशीनगर के कसया क्षेत्र में बनेंगे। एक ब्रिज 120 मीटर लंबा होगा और दूसरा 70 मीटर का। इसके अलावा 38 माइनर ब्रिज बनाए जाएंगे, जिनकी स्पैन लंबाई 60 मीटर से कम होगी। ट्रैफिक को बिना रुकावट चलाने के लिए 35 छोटे अंडरपास (एसवीयूपी), छह बड़े अंडरपास (एलवीयूपी) और नौ व्हीकल अंडरपास (वीयूपी) बनाए जाएंगे। इन सभी की चौड़ाई और ऊंचाई आधुनिक मानकों के अनुसार तय की गई है।
86.6 किमी लंबा होगा एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा
गोरखपुर से कुशीनगर होते हुए बिहार सीमा तक इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 86.600 किलोमीटर होगी। यह हिस्सा पूर्वांचल के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इससे न केवल उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि आगे सिलीगुड़ी तक सीधा संपर्क बनने से पूर्वोत्तर भारत तक पहुंच आसान हो जाएगी।
जमीन अधिग्रहण के लिए थ्रीडी सर्वे शुरू
इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसके तहत अंतिम थ्रीडी सर्वे किया जा रहा है। इस सर्वे के जरिए यह तय किया जाएगा कि किस गांव या इलाके की कितनी जमीन एक्सप्रेसवे में शामिल होगी। साथ ही यह भी लगभग तय हो गया है कि किस स्थान पर ब्रिज, अंडरपास और इंटरचेंज बनाए जाएंगे।
भविष्य के विकास का बनेगा इंजन
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ललित प्रताप पाल के अनुसार, डीपीआर एजेंसी ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसमें बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। इसका मतलब है कि प्रोजेक्ट अब तेजी से आगे बढ़ेगा। यह एक्सप्रेसवे भविष्य में लॉजिस्टिक्स, व्यापार और पर्यटन के लिए गेमचेंजर साबित होगा।
पूर्वांचल को मिलेगा नई रफ्तार का गिफ्ट
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि पूर्वांचल के विकास का मजबूत आधार बनने जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही लोगों की यात्रा तेज, सुरक्षित और आरामदायक होगी।
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