थाईलैंड से गोरखपुर पहुंचा 80 लाख का गांजा: इंटरनेशनल नेटवर्क का पर्दाफाश, डिलीवरी से पहले पकड़े गए तस्कर

गोरखपुर|23 घंटे पहले
इंटरनेशनल नेटवर्क का पर्दाफाश, डिलीवरी से पहले पकड़े गए तस्कर

पूर्वांचल में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने रेलवे स्टेशन क्षेत्र के पास छापेमारी कर लगभग 80 लाख रुपये मूल्य का विदेशी हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया है। इस कार्रवाई के दौरान बिहार और गोरखपुर से जुड़े तीन आरोपियों को अरेस्ट किया गया। वहीं मामले में कुछ अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, बरामद गांजे की खेप थाईलैंड से भारत लाई गई थी और कोलकाता होते हुए बिहार के रास्ते गोरखपुर पहुंची थी। इस खुलासे के बाद पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने इंटरनेशनल ड्रग तस्करी नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी है।

एएनटीएफ को सूचना मिली थी कि विदेशी गांजे की एक बड़ी खेप गोरखपुर में पहुंच चुकी है। उसकी डिलीवरी की तैयारी चल रही है। सूचना के आधार पर रेलवे स्टेशन क्षेत्र में घेराबंदी कर कार्रवाई की गई। मौके से गोला क्षेत्र के मेहड़ा गांव निवासी सत्यम शुक्ला, बिहार के सीवान जिले के दरौदा थाना क्षेत्र स्थित कोल्हुआ निवासी संजय कुमार यादव और गुलरिहा क्षेत्र के लगड़ी गांव निवासी मोहम्मद असलम उर्फ मुन्ना को अरेस्ट कर लिया गया। आरोपियों के कब्जे से 770 ग्राम विदेशी हाइड्रोपोनिक गांजा और एक कार बरामद की गई। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि संजय कुमार यादव गांजे की खेप लेकर गोरखपुर पहुंचा था। रेलवे स्टेशन के आसपास उसकी सप्लाई की तैयारी की जा रही थी।

थाईलैंड से कोलकाता और बिहार होते हुए पहुंची खेप

पूछताछ में तस्करों ने खुलासा किया कि विदेशी गांजा थाईलैंड से भारत लाया गया था। इसके बाद इसे कोलकाता के जरिए बिहार पहुंचाया गया। फिर गोरखपुर में सप्लाई के लिए भेजा गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस इंटरनेशनल नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। विदेशी नशीले पदार्थों की खेप भारत में किस माध्यम से प्रवेश कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल गोरखपुर या पूर्वांचल तक सीमित नहीं है। इसके तार कई राज्यों और विदेशों तक जुड़े हो सकते हैं।

क्या है हाइड्रोपोनिक या ओजी गांजा?

एएनटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, बरामद हाइड्रोपोनिक गांजा, जिसे ओजी गांजा भी कहा जाता है। सामान्य गांजे से काफी अलग होता है। इसे विशेष नियंत्रित वातावरण में आधुनिक हाइड्रोपोनिक तकनीक के जरिए तैयार किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सामान्य गांजे जैसी तीव्र गंध नहीं होती। जिससे इसकी पहचान करना अपेक्षाकृत कठिन हो जाता है। वहीं इसका नशीला प्रभाव कई गुना अधिक माना जाता है। इसी वजह से इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमत बेहद ऊंची होती है। अधिकारियों के अनुसार, बरामद 770 ग्राम गांजे की अनुमानित कीमत करीब 80 लाख रुपये आंकी गई है।

हाईप्रोफाइल नेटवर्क की जांच में जुटी एजेंसियां

जांच एजेंसियों को आशंका है कि विदेशी नशीले पदार्थों की यह सप्लाई किसी संगठित और प्रभावशाली नेटवर्क के जरिए संचालित की जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस खेप की आपूर्ति हाईप्रोफाइल ग्राहकों तक तो नहीं की जानी थी। एएनटीएफ और स्थानीय पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और संपर्क सूत्रों की गहन पड़ताल कर रही है। मामले में दो अन्य संदिग्धों की भी तलाश जारी है।

पहले भी हो चुकी है विदेशी गांजे की बरामदगी

गोरखपुर में हाल के महीनों में विदेशी गांजे की यह दूसरी बड़ी बरामदगी है। इससे पहले कैंट क्षेत्र में भी ओजी गांजे की खेप पकड़ी गई थी। लगातार सामने आ रहे मामलों ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस का मानना है कि पूर्वांचल में विदेशी नशीले पदार्थों की सप्लाई करने वाला एक संगठित गिरोह सक्रिय है। फिलहाल कैंट थाने में आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

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