एम्स में इमरजेंसी में 48 घंटे से ज्यादा नहीं रुकेंगे पेशेंट : हालत स्थिर होने पर कर दिया जाएगा शिफ्ट, नई पॉलिसी से सिस्टम होगा फास्ट

गोरखपुर|24 अप्रैल 2026
हालत स्थिर होने पर कर दिया जाएगा शिफ्ट, नई पॉलिसी से सिस्टम होगा फास्ट

एम्स गोरखपुर में इमरजेंसी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए नई पॉलिसी लागू कर दी गई है। अब इमरजेंसी वार्ड में किसी भी मरीज को अधिकतम 24 से 48 घंटे तक ही रखा जाएगा। इसके बाद मरीज को उसकी बीमारी के अनुसार संबंधित विभाग के वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह फैसला मरीजों को समय पर इलाज देने और इमरजेंसी पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए लिया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इमरजेंसी में बेड मैनेजमेंट ज्यादा व्यवस्थित होगा और गंभीर मरीजों को तुरंत जगह मिल सकेगी।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पहले इमरजेंसी वार्ड में मरीज लंबे समय तक भर्ती रहते थे। इससे बेड लगातार भरे रहते थे। नए मरीजों को भर्ती करने में दिक्कत होती थी। कई बार गंभीर मरीजों को इंतजार करना पड़ता था या दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था। इस समस्या को देखते हुए यह नई नीति बनाई गई है। अब प्राथमिक इलाज के बाद मरीजों को जल्दी शिफ्ट किया जाएगा। इससे इमरजेंसी की कार्यक्षमता बढ़ेगी। इलाज की गति तेज होगी।

कैसे काम करेगी नई व्यवस्था

नई पॉलिसी के तहत इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को पहले 24 से 48 घंटे के भीतर जरूरी जांच और ट्रीटमेंट दिया जाएगा। इस दौरान डॉक्टर मरीज की स्थिति का मूल्यांकन करेंगे। अगर मरीज की हालत स्थिर हो जाती है तो उसे संबंधित विभाग में शिफ्ट कर दिया जाएगा। वहीं अगर मरीज की स्थिति गंभीर रहती है तो उसे बेहतर सुविधाओं वाले सेंटर में रेफर किया जा सकता है। ट्रामा सेंटर के मामलों में भी यही नियम लागू होगा। वहां भी मरीज को 48 घंटे से ज्यादा नहीं रखा जाएगा।

गंभीर मरीजों को मिलेगा फायदा

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा गंभीर मरीजों को मिलेगा। पहले बेड खाली न होने के कारण कई मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता था। अब बेड जल्दी खाली होंगे। इससे नए मरीजों को तुरंत भर्ती किया जा सकेगा। डॉक्टरों को भी इलाज में आसानी होगी। इमरजेंसी सेवाएं ज्यादा फास्ट और प्रभावी बनेंगी। अस्पताल का मानना है कि इससे मौत के मामलों में भी कमी आ सकती है।

ओपीडी के इस्तेमाल पर जोर

अस्पताल प्रशासन ने आम लोगों से खास अपील की है। कहा गया है कि इमरजेंसी का इस्तेमाल केवल गंभीर स्थिति में ही करें। सामान्य बीमारी, चेकअप या सलाह के लिए ओपीडी सेवाओं का उपयोग करें। इससे इमरजेंसी में भीड़ कम होगी। डॉक्टर गंभीर मरीजों पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे। यह कदम पूरे सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

प्रबंधन और संसाधनों में सुधार

नई पॉलिसी से अस्पताल के संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा। बेड मैनेजमेंट सुधरेगा। मरीजों की आवाजाही व्यवस्थित होगी। इलाज की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही स्टाफ पर दबाव भी कम होगा। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह कदम लंबे समय में हेल्थ सिस्टम को मजबूत करेगा।

प्रशासन का बयान

एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डा. विभा दत्ता ने कहा कि यह व्यवस्था मरीजों की सुविधा के लिए लागू की गई है। इसका उद्देश्य इमरजेंसी सेवाओं को ज्यादा प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि सभी मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिलना प्राथमिकता है।

नव्य जागरण

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