ओटीपी सिस्टम में फंसा इलाज: रेफरल के बाद भी अस्पताल में एंट्री मुश्किल, टेक्निकल गड़बड़ी से बढ़ रही मरीजों की परेशानी

स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल सिस्टम जहां सुविधा देने के लिए बनाया गया था, वहीं अब यह मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर से सेवानिवृत्त रेलकर्मी की 65 वर्षीय पत्नी अहिल्या देवी को इलाज के लिए गुरुग्राम के बड़े अस्पताल में घंटों इंतजार करना पड़ा। वह ओपीडी में बैठी रहीं। उनका बेटा सचिन कुमार श्रीवास्तव बार-बार कर्मचारियों से गुहार लगाता रहा। लेकिन काउंटर पर बैठे स्टाफ ने साफ मना कर दिया। कारण सिर्फ एक था। मरीज के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी जनरेट नहीं हो रहा था। बिना ओटीपी के सिस्टम में एंट्री संभव नहीं थी।
अहिल्या देवी ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं। उन्हें बार-बार झटके आ रहे थे। हालत लगातार बिगड़ रही थी। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने नियमों का हवाला देकर इलाज शुरू नहीं किया। सचिन ने गोरखपुर के रेलवे अस्पताल से संपर्क करने की कोशिश की। कई बार फोन किया। लेकिन वहां से भी कोई समाधान नहीं मिला। आखिरकार मजबूरी में उन्होंने अपनी मां को निजी खर्च पर डॉक्टर को दिखाया। बिना भर्ती कराए ही वापस गोरखपुर लौटना पड़ा।
एक नहीं, कई पेशेंट परेशान
यह समस्या सिर्फ एक पेशेंट तक सीमित नहीं है। सरस्वती देवी और मोहम्मद अकीक जैसे कई गंभीर पेशेंट इसी परेशानी से जूझ रहे हैं। सभी को रेलवे अस्पताल से रेफर किया गया था। लेकिन बड़े अस्पताल पहुंचने के बाद ओटीपी न आने के कारण इलाज नहीं हो पा रहा। काउंटर पर मौजूद कर्मचारी साफ कह रहे हैं कि सिस्टम के बिना कुछ संभव नहीं है। इससे पेशेंट और उनके परिजन मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से परेशान हैं।
रेलवे अस्पताल और मेदांता के बीच फंसा सिस्टम
रेलवे अस्पताल का कहना है कि उन्होंने मरीजों को ऑनलाइन रेफर कर दिया है। उनका सिस्टम सही काम कर रहा है। दूसरी तरफ बड़े अस्पताल के कर्मचारी ओटीपी न आने का हवाला देकर मरीजों को लौटा रहे हैं। इस बीच सबसे ज्यादा नुकसान मरीजों को उठाना पड़ रहा है। लंबा सफर। खर्चा और फिर बिना इलाज लौटना। इससे मरीजों की हालत और बिगड़ रही है।
यूनियन ने जताई नाराजगी
इस मुद्दे पर रेलवे कर्मचारियों में भी नाराजगी बढ़ रही है। सेवानिवृत्त रेलकर्मी शशि कुमार ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन को लिखित शिकायत दी जाएगी। वहीं एनई रेलवे मजदूर यूनियन ने इसे गंभीर मुद्दा बताया है। यूनियन के संयुक्त महामंत्री ओंकार नाथ सिंह ने कहा कि यह सीधे-सीधे मरीजों के इलाज से जुड़ा मामला है। गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा। इससे उनकी जान को खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
एचएमआईएस सिस्टम बना परेशानी की वजह
जब से हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) लागू हुआ है, तब से यह समस्या सामने आ रही है। ऑनलाइन रेफरल की प्रक्रिया में ओटीपी जरूरी कर दिया गया है। लेकिन तकनीकी खामी के कारण कई बार ओटीपी जनरेट नहीं हो पा रहा। इससे पूरा सिस्टम रुक जा रहा है। मरीजों को इसका सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा है।
जल्द समाधान का दावा
रेलवे अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. मोहम्मद एए खान ने कहा कि ओटीपी से जुड़ी कुछ शिकायतें मिली हैं। इस समस्या को लेकर एचएमआईएस हेल्प डेस्क को मेल किया गया है। जिन मरीजों को दिक्कत हो रही है, उन्हें अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को फिर से अपडेट करना होगा। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।
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