गोरखपुर से शुरू हुई 81 दिन की ‘गो सेवा यात्रा’: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा अभियान, यात्रा का शुभारंभ और उद्देश्य

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रविवार सुबह गोरखपुर से 81 दिनों की ‘गो सेवा यात्रा’ की शुरुआत की। कार्यक्रम की शुरुआत सहारा एस्टेट स्थित भारत माता मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद उन्होंने अपने शिष्यों और समर्थकों को संबोधित किया और करीब सुबह 10 बजे यात्रा रवाना हुई। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गायों के संरक्षण को बढ़ावा देना और ‘गो माता’ को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने के लिए जनजागरण करना है। यह यात्रा धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से अहम मानी जा रही है।
यह यात्रा उत्तर प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेगी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद रोजाना पांच विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचेंगे और लोगों को संबोधित करेंगे। यात्रा रोज सुबह नौ बजे शुरू होकर शाम छह बजे तक चलेगी। खास बात यह है कि स्वामी जी अपने रथ से ही लोगों को संबोधित करेंगे, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक संदेश पहुंच सके। इस अभियान का समापन 23 जुलाई को गोरखपुर में एक बड़ी जनसभा के साथ होगा, जहां हजारों लोगों के जुटने की संभावना है।
प्रशासन की सख्ती और व्यवस्थाएं
जिला प्रशासन ने इस कार्यक्रम के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सहारा एस्टेट में आयोजन के लिए 29 शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। तय कार्यक्रम के अनुसार सुबह सात बजे स्वामी जी मंच पर पहुंचे, जहां पूजन-अर्चन और चरण पादुका पूजन किया गया। इसके बाद उन्होंने लोगों को संबोधित किया और यात्रा को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई गई। प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी खास इंतजाम किए हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
बड़ा काफिला और संतों की मौजूदगी
इस यात्रा की एक खास बात इसका बड़ा काफिला है। शंकराचार्य का रथ लगभग 100 से ज्यादा गाड़ियों के साथ चल रहा है। उनके साथ करीब 50 साधु-संत और बटुक भी शामिल हैं। इसके अलावा उनकी ‘चतुरंगिणी सेना’ के 11 सदस्य सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। जगह-जगह स्थानीय शिष्य और समर्थक भी अपने वाहनों के साथ जुड़ते जाएंगे। अनुमान है कि कुल मिलाकर 150 से 200 लोग इस यात्रा का हिस्सा रहेंगे। यह काफिला जहां-जहां से गुजरेगा, वहां माहौल पूरी तरह धार्मिक और उत्सवी नजर आएगा।
रोज 150-200 किमी का सफर
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस यात्रा के दौरान रोजाना 150 से 200 किलोमीटर का सफर तय करेंगे। पहले दिन यात्रा गोरखपुर, संतकबीरनगर और बांसगांव लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों से गुजरी। सहारा एस्टेट से निकलकर यात्रा नौसढ़ होते हुए सहजनवा पहुंची, जहां स्वामी जी का जोरदार स्वागत हुआ। इसके बाद यात्रा खजनी, बांसगांव, चिल्लूपार होते हुए चौरी चौरा पहुंची, जहां रात्रि विश्राम किया गया। अगले दिन यह यात्रा कुशीनगर जिले में प्रवेश करेगी और आगे का सफर जारी रहेगा।
‘गविष्टि’ का मतलब और संदेश
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस यात्रा के नाम ‘गविष्टि’ का अर्थ भी बताया। उनके अनुसार ‘गविष्टि’ का मतलब है गौ माता की रक्षा के लिए धर्मयुद्ध। उन्होंने कहा कि गोरखपुर से बेहतर इस अभियान की शुरुआत के लिए कोई जगह नहीं हो सकती। उनका मानना है कि यह यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का अभियान भी है। इसके जरिए लोगों को गो रक्षा और उससे जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
पूर्वजों की धरती से लिया आशीर्वाद
यात्रा शुरू करने से पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने पूर्वजों के गांव इटार पनिका भी पहुंचे। यहां उन्होंने टेकधर बाबा ब्रह्मस्थान पर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि यह उनका मूल स्थान है और यहां आकर उन्हें प्रेरणा मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि इस यात्रा को लेकर उन्हें कुछ धमकियां भी मिली हैं, लेकिन वह बिना डरे अपना अभियान जारी रखेंगे।
यूजीसी कानून पर भी जताई नाराजगी
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूजीसी कानून पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे समाज को बांटने वाला बताया और कहा कि इससे आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने की अपील की और कहा कि समाज की एकता ही सबसे बड़ी ताकत है।
समापन में होगी बड़ी जनसभा
यह 81 दिनों की यात्रा 23 जुलाई को गोरखपुर में समाप्त होगी। समापन के अवसर पर एक बड़ी जनसभा आयोजित की जाएगी। इस दौरान यात्रा के अनुभव साझा किए जाएंगे और आगे की रणनीति पर भी चर्चा होगी। इस पूरी यात्रा को लेकर धार्मिक और सामाजिक दोनों वर्गों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
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