राप्ती की लहरों में समाए तीन दोस्त: एक की बची जान, गांव में पसरा सन्नाटा, शाम तक तलाश में जुटी रही गोताखोरों की टीम

गोरखपुर जिले के चिलुआताल थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। शुक्रवार दोपहर राप्ती नदी में नहाने गए तीन किशोर गहरे पानी की चपेट में आने से डूब गए। चिलुआताल के बंजरहा गांव के पास निर्माणाधीन पुल के नीचे हुए इस हादसे ने तीन घरों के चिराग बुझा दिए हैं। घटना के बाद से नदी किनारे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।
जानकारी के अनुसार, बरियारपुर गांव के शुभम यादव (19), अभय उर्फ बंटी (18) और काजीपुर के शिव साहनी (20) और अपने एक अन्य साथी बुढ़ियाबारी निवासी शुभम यादव के साथ शुक्रवार की दोपह 2:30 बजे राप्ती नदी के किनारे घूमने गए थे। गर्मी से राहत पाने के लिए चारों लोग नदी में नहाने उतरे। नहाते समय वे निर्माणाधीन पुल के पास उस जगह चले गए जहां पानी काफी गहरा था। एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में तीनों गहरे पानी में समा गए। इस दौरान बरियारपुर निवासी शुभम यादव किसी तरह तैरकर बाहर निकल आया और उसने आसपास के लोगों को घटना की जानकारी दी।
आसपास मौजूद ग्रामीणों ने जब लड़कों को डूबते देखा तो शोर मचाया। सूचना मिलते ही मजनू चौकी पुलिस और स्थानीय गोताखोर मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
अभय उर्फ बंटी (18) कृपा यादव का बेटा अभय महात्मा गांधी इंटर कॉलेज में 10वीं का छात्र था। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। मजदूरी कर घर चलाने वाले पिता के लिए अभय ही उनकी दुनिया और बुढ़ापे की लाठी था। उसकी मां बेसुध हालत में बस एक ही रट लगाए हुए हैं- "अब हम किसके सहारे जिएंगे?"
शुभम यादव (19) विनोद यादव (शिक्षामित्र) के पुत्र शुभम 12वीं के छात्र थे। पिता ने बड़े अरमानों से बेटे को पढ़ाया था ताकि वह भविष्य संवार सके। शुभम के जाने से उसके दो भाई और एक बहन सदमे में हैं। नदी किनारे बैठी मां की पथराई आंखें अब भी लहरों में अपने बेटे को तलाश रही हैं।
शिव साहनी (20) राम लखन के बेटे शिव भी 12वीं के छात्र थे। घर में तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े शिव से परिवार को बड़ी उम्मीदें थीं। पेंट-पॉलिश का काम करने वाले पिता को उम्मीद थी कि बेटा पढ़-लिखकर गरीबी दूर करेगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
गांव में पसरा सन्नाटा, पुलिस की तलाश जारी
हादसे की खबर फैलते ही बंजरहा, बरियारपुर और काजीपुर गांव में चूल्हे नहीं जले। हर कोई नदी किनारे की ओर दौड़ पड़ा। पुलिस और गोताखोरों की टीम देर शाम तक तलाश में जुटी रही, लेकिन अंधेरा और पानी का बहाव बचाव कार्य में बाधा बनता रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माणाधीन पुल के पास अक्सर पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता जो जानलेवा साबित होता है। देर रात तक परिजन इसी उम्मीद में नदी किनारे डटे रहे कि शायद कोई चमत्कार हो जाए और उनके कलेजे के टुकड़े सही-सलामत बाहर आ जाएं।
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