4.50 करोड़ से बनेंगे दो पशु शवदाह गृह: ताल नदौर ने बन रहा है 2000 पशुओं की क्षमता वाला कान्हा उपवन, वैधानिक तरीके से शवदाह करने पर मिलेगी प्रदूषण से मुक्ति

गोरखपुर|06 मार्च 2026
ताल नदौर ने बन रहा है 2000 पशुओं की क्षमता वाला कान्हा उपवन, वैधानिक तरीके से शवदाह करने पर मिलेगी प्रदूषण से मुक्ति

नगर निगम ने निराश्रित गोवंशीय पशुओं के संरक्षण के साथ-साथ उनकी मृत्यु के बाद शरीर को सम्मानजनक और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की दिशा में बड़ी पहल शुरू की है। ताल नदौर स्थित निर्माणाधीन वृहद कान्हा उपवन परिसर में दो अत्याधुनिक पशु शवदाह घर स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक यूनिट पर लगभग 4.50 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इस तरह कुल 9 करोड़ रुपये की यह परियोजना राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित है। यह पहल निराश्रित गोवंश संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। गोरखपुर-वाराणसी राजमार्ग पर 28.94 करोड़ रुपये की लागत से 2000 गोवंशीय पशुओं की क्षमता वाला वृहद कान्हा उपवन बनाया जा रहा है। इस परियोजना को अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कान्हा उपवन तैयार होने के बाद बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंशीय पशुओं को सुरक्षित आश्रय मिल सकेगा।

एकला में बना है शवदाह गृह

इसी परिसर में पशु चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण भी चल रहा है। इसके शुरू होने के बाद बीमार और घायल गोवंशीय पशुओं को आधुनिक और उच्च स्तरीय उपचार सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इससे पशुओं की देखभाल और बेहतर तरीके से हो पाएगी। वर्तमान में जिले में मृत पशुओं के निस्तारण के लिए एकला बांध स्थित नगर निगम का एकमात्र पशु शवदाह गृह ही सहारा है। बढ़ती संख्या को देखते हुए यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जा रही थी। नए कान्हा उपवन परिसर में अत्याधुनिक शवदाह गृह बनने से संरक्षित निराश्रित गोवंशीय पशुओं के मृत होने पर उनका वैज्ञानिक, स्वच्छ और प्रदूषणरहित तरीके से अंतिम निस्तारण किया जा सकेगा। इससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी और आसपास के क्षेत्रों में गंदगी व दुर्गंध की समस्या कम होगी।

स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन

नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि ताल नदौर स्थित निर्माणाधीन कान्हा उपवन में पशु शवदाह गृह बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्वच्छता और पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए निर्माण विभाग को डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न सिर्फ निराश्रित गोवंश के संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि शहर में स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा।

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