गोमतीनगर भूमि समायोजन घोटाले की जांच तेज: ED ने किया तलब, 300 करोड़ की फाइलों की हो रही पड़ताल

राजधानी के चर्चित गोमतीनगर और गोमतीनगर विस्तार भूमि समायोजन प्रकरण में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सक्रियता बढ़ गई है। करोड़ों रुपये के कथित भूमि घोटाले की जांच को नई दिशा दी। ईडी ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के अर्जन विभाग से महत्वपूर्ण दस्तावेज और फाइलें तलब की हैं। शुरुआती जांच में करीब 300 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि और उसके समायोजन से जुड़े मामलों की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियों का फोकस केवल भूमि आवंटन तक सीमित नहीं है। उस पूरी प्रक्रिया को भी खंगाला जा रहा है जिसके माध्यम से सरकारी भूमि और समायोजन नीति का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, गोमतीनगर और गोमतीनगर विस्तार क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण और समायोजन की प्रक्रिया के दौरान सहकारी आवास समितियों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि निर्धारित मानकों से कहीं अधिक भूमि प्राप्त करने के बाद उसे प्रभावशाली लोगों और भूमाफिया से जुड़े व्यक्तियों को बेहद कम कीमत पर आवंटित कर दिया गया। इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा। भूमि समायोजन की मूल भावना को भी आघात पहुंचा। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं। जिन लोगों को भूखंड आवंटित किए गए, उनका वास्तविक पात्रता मानकों से क्या संबंध था। आवंटन प्रक्रिया में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही। ईडी की जांच में वित्तीय लेन-देन, संपत्ति हस्तांतरण और लाभार्थियों के नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।
234 भूखंडों के आवंटन में मिली थीं गंभीर अनियमितताएं
वर्ष 2010 में तत्कालीन एलडीए उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल की अगुवाई में जांच हुई थी। हिमालय सहकारी आवास समिति और बहुजन निर्मल समिति के माध्यम से किए गए भूखंड समायोजन में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। जांच रिपोर्ट के अनुसार कुल 234 भूखंडों के आवंटन में नियमों की अनदेखी की गई थी। इनमें हिमालय समिति के 122 और बहुजन निर्मल समिति के 112 भूखंड शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया था कि समितियों में परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और कथित फर्जी सदस्यों को शामिल कर प्राइम लोकेशन वाले भूखंड हासिल किए गए। शासन स्तर पर हुई पड़ताल में भी कई आवंटनों को संदिग्ध माना गया था। अब ईडी इन्हीं मामलों से जुड़े वित्तीय लाभ और संपत्ति हस्तांतरण की श्रृंखला को खंगाल रही है।
रिकॉर्ड की कमी बनी जांच का अहम बिंदु
जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। एलडीए के अर्जन विभाग के पास कई मामलों से संबंधित पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। ऐसे में एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं। वास्तविक रूप से कितनी भूमि अधिग्रहित की गई थी। उसके बदले कितनी भूमि समायोजन के तहत प्रदान की गई। रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियां जांच को और अधिक गंभीर बना रही हैं।
अधिकारियों और लाभार्थियों पर भी नजर
दिवंगत दिलीप सिंह बाफिला का नाम इस पूरे प्रकरण में लंबे समय से चर्चा में रहा है। उनके खिलाफ विभिन्न थानों में दो दर्जन से अधिक आपराधिक केस दर्ज रहे हैं। इससे पहले पुलिस कमिश्नरेट उनकी 48 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की कथित अवैध संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई भी कर चुका है। ईडी की बढ़ती सक्रियता के बाद अब तत्कालीन एलडीए अधिकारियों, कर्मचारियों, सहकारी समितियों के पदाधिकारियों और कथित लाभार्थियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। माना जा रहा है कि दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच के बाद इस बहुचर्चित भूमि प्रकरण में कई नए खुलासे हो सकते हैं। जिससे आने वाले दिनों में कुछ बड़े नामों पर भी शिकंजा कसने की संभावना है।
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